
- मुख्यमंत्री से मिले ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधिमंडल ने रखी मांग
- मजदूरों के लिये वेलफेयर बोर्ड, पीएफ, ईएसआइ की मांग की गयी
Ranchi: राज्य के मजदूरों की स्थिति कोविड 19 के बाद से गंभीर हो गयी है. विशेषकर असंगठित क्षेत्र के मजदूरों की स्थिति और भी बदतर है. ये बातें ट्रेड यूनियनों की ओर से मुख्यमंत्री को बतायी गयीं. वाम ट्रेड यूनियनों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को मुख्यमंत्री से मुलाकात की. इस दौरान श्रमिकों और श्रम कानून से संबधित कई बिंदुओं पर चर्चा की गयी.
एटक के पीके गांगूली ने बताया कि मुख्यमंत्री को जानकारी दी गयी है कि कोल इंडिया के मुआवजा के बदले जमीन नहीं देने और मुआवजा रोका जाने का प्रावधान गलत है. नियोजन के साथ मुआवजा की व्यवस्था जारी रखने की मांग की गयी.
निर्माण उद्योग और परिवहन में लगे मजदूरों के लिये वेलफेयर बोर्ड का गठन हो जिसमें श्रम संगठनों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाये. सेल्स प्रमोशन कार्य में लगी महिलाओं को मैटरनिटी लीव समेत अन्य सुविधाएं मिलनी चाहिए.
गांगूली ने कहा कि इस दौरान मुख्य रूप से श्रमिकों को पीएफ और ईएसआइ सुविधा दिये जाने की मांग की गयी. उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने आश्वास्त करते हुए कहा कि इन मुद्दों पर सकारात्मक पहल की जायेगी.
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980 श्रम संगठनों के निबंधन रद्द होने पर सरकार करे हस्तक्षेप
श्रमिक संगठनों की ओर से बताया गया कि साल 2016 में बिहार श्रम विभाग की ओर से 980 श्रमिक संगठनों के निबंधन को रद्द कर दिया गया था. हाइकोर्ट ने भी बिहार सरकार के इस निर्णय को साल 2018 में गलत बताया था.
ऐसे में श्रम विभाग झारखंड सरकार की ओर से 2019 में बैठक बुलायी गयी जिसमें निर्णय लिया गया था कि राज्य सरकार भी इन संगठनों को एक निबंधन संख्या देगी जो बिहार राज्य में निबंधित संख्या के साथ ही काम करेगी.
ऐसे में संगठनों की मांग रही कि बिहार श्रम विभाग सारे दस्तावेज राज्य श्रम विभाग को दें. जैसा 2000 के बाद से गठित अन्य राज्यों में भी हुआ. लेकिन बिहार सरकार ने ऐसा नहीं किया. संगठनों की ओर से मांग की गयी कि इस मामले में सरकार हस्तक्षेप करे और समस्या का समाधान करे.
सीटू के प्रकाश विप्लव ने जानकारी दी कि राज्य में न्यूनतम मजदूरी दर की समीक्षा जरूरी है. समीक्षा के बाद इसे फिर से लागू किया जाये. नये यूनियनों के निबंधन और श्रमिकों के पहचान पत्र की प्रक्रिया पूरी की जाये. उन्होंने कहा कि श्रम विभाग से समय-समय पर इसकी मांग की गयी है. लेकिन इस पर कोई पहल नहीं की गयी.
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