
Ranchi : जिस वर्ष राज्य में नौकरी देने की बात की गयी थी उस वर्ष राज्य को नयी नियुक्ति नियमावली मिली. नये साल की शुरुआत में राज्य में विज्ञापन निकलने शुरू हुए, लेकिन हर विज्ञापन के साथ जो विवाद सामने आ रहा है उससे यही लगता है कि झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की ओर से जितने भी विज्ञापन निकाले गये हैं उसका मकसद नौकरी न दे कर विवादों को जन्म देना है.
फिलहाल झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की ओर से जूनियर इंजीनियर नियुक्ति परीक्षा, सामान्य स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रवेश परीक्षा, वैज्ञानिक सहायक परीक्षा और उत्पाद सिपाही नियुक्ति परीक्षा का विज्ञापन जारी किया गया है. इन जारी विज्ञापन में एक भी ऐसा विज्ञापन नहीं है जो किसी न किसी विवाद से अछूता हो.
झारखंड सामान्य स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की ओर से जारी किये गये इस नियुक्ति परीक्षा के विज्ञापन से चार विभिन्न पदों पर बहाली की जानी है. कुल 956 पदों में नियुक्ति होगी. इस विज्ञापन के जारी होते ही कई विवाद सामने आ गये. पहला विवाद आवेदन के लिए निर्धारित उम्रसीमा को लेकर है. यह वही विज्ञापन है जिसके लिए चौथी बार एप्लीकेशन लिया जा रहा है. इस विज्ञापन में उम्रसीमा में 10 साल से अधिक का अंतर कर दिया गया है. इस वजह से हजारों की संख्या में योग्यता रखने वाले उम्मीदवार एप्लीकेशन से वंचित हो गये हैं. इस विज्ञापन का जब पहला आवेदन लिया गया था तब उम्रसीमा 2010 निर्धारित किया गया था.
इस विज्ञापन का दूसरा विवाद जनजातीय और क्षेत्रीय भाषा को लेकर है. इसके अंतर्गत खोरठा विषय के सिलेबस को दूसरी बार बाद दिया गया है. इस विज्ञापन का तीसरा विवाद आवेदन शुल्क को लेकर है. साल 2019 में जब आवेदन लिया गया था तब परीक्षा शुल्क 1000 रुपये लिया गया. वही जब 2022 में आवेदन लिया जा रहा है तब परीक्षा शुल्क 100 रुपये है. उम्मीदवार समझ नहीं पा रहे हैं कि पहले का दिया हुआ पैसा वापस मिलेगा या नहीं.
झारखंड उत्पाद सिपाही प्रतियोगिता परीक्षा
नियुक्ति के इस विज्ञापन को पहले रद्द किया गया. इसके बाद फिर से जारी किया गया. इस विज्ञापन के जरिये 583 पदों पर बहाली होनी है. इसके लिए जो नियुक्ति परीक्षा ली जायेगी, विवाद इसी परीक्षा पैटर्न को लेकर है. बताते चलें कि राज्य सरकार ने नियुक्तियों में क्षेत्रीय और जनजातीय भाषा को अनिवार्य किया है. राज्य सरकार की ओर से जारी क्षेत्रीय और जनजातीय भाषा सूची में भोजपुरी और मगही भाषा को शामिल किया गया है, लेकिन झारखंड उत्पाद सिपाही प्रतियोगिता परीक्षा में से इन दो विषयों को हटा दिया गया है. जबकि स्नातक स्तरीय परीक्षा में उक्त दोनों विषय शामिल हैं.




