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JPSC मेन्स एग्जाम को लेकर हाईकोर्ट में सुनवाई टली, अब परीक्षा वाले दिन सोमवार को होगी सुनवाई

हाईकोर्ट कर्मचारी नंदकिशोर चौधरी के निधन के कारण टली सुनवाई

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  • विधायिका की सर्वमान्यता पर शिवशंकर उरांव ने जतायी चिंता 
  • शुक्रवार को ग्रामीण विकास मंत्री नीलकंठ मुंडा और अशोक भगत से मुलाकात का हुआ प्रयास
  • मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अनिरुद्ध बोस व जस्टिस रत्नाकर भेंगरा की अदालत करेगी सुनवाई

Ranchi: छठी झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की मुख्य परीक्षा के आयोजन में अब भी संशय कायम है. आयोग ने मुख्य परीक्षा की तिथि घोषित कर दी है, जिसके तहत 28 जनवरी से परीक्षा आयोजित होनी है. दूसरी तरफ जहां आंदोलनरत छात्र मुख्य परीक्षा स्थगित कराने के लिए प्रयासरत है. वहीं इस मामले में शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अनिरुद्ध बोस व जस्टिस रत्नाकर भेंगरा की अदालत में परीक्षा स्थगित कराने को लेकर दाखिल याचिका पर होनेवाली सुनवाई भी टल गई है.दरअसल, हाईकोर्ट कर्मचारी नंदकिशोर चौधरी के निधन के कारण शोक सभा के बाद सुनवाई टल गई.

मामले पर अब परीक्षा वाले दिन यानी 28 जनवरी दिन सोमवार को ही सुनवाई होगी. LPA-399/2018 स्पेशल बेंच द्वारा ये सुनवाई होगी. इस दिन से परीक्षा भी होनी है. इससे पहले गुरुवार को गुमला विधायक शिवशंकर उरांव के नेतृत्व में छात्रों का एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मिला था.

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वहीं शुक्रवार सुबह इन छात्रों ने ग्रामीण विकास मंत्री नीलकंठ मुंडा और अशोक भगत से मुलाकात करने की कोशिश की है. नीलकंठ सिहं से तो मुलाकात होने की जानकारी नहीं है. लेकिन अशोक भगत से मुलाकात हुई थी. इस दौरान उन्होंने छात्रों को हाईकोर्ट के निर्णय आने तक रोकने की बात कही है.

आ सकता है हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

मालूम हो कि छठी मुख्य परीक्षा स्थगित करने को लेकर वादी पंकज पांडेय की ओर से कोर्ट में एक याचिका दायर की है. इसी मामले में शुक्रवार को कोर्ट में सुनवाई होनी थी, जो टल गई. छात्रों की तरफ से कयास लगाया जा रहा है, कि कोर्ट में उनके पक्ष में एक बड़ा फैसला आ सकता है. इससे पहले गत सोमवार, मंगलवार और बुधवार को भी हाईकोर्ट में आंशिक सुनवाई तो हुई थी. लेकिन कोई फैसला नहीं आ सका.

विज्ञापन में छेड़छाड़ को लेकर याचिका 

हाईकोर्ट में पंकज कुमार पांडेय की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया है कि सरकार द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि मुख्य परीक्षा में न्यूनतम क्वालिफाइंग मार्क्स प्राप्त करने वाले ही शामिल होंगे. जो कि विज्ञापन में पूरी तरह से छेड़छाड़ किया गया है. इसपर उन्होंने एकल खंडपीठ में एक अधिसूचना दाखिल की थी. हालांकि सुनवाई के दौरान एकलपीठ ने सरकार की अधिसूचना को सही ठहराते हुए पंकज पांडेय की याचिका खारिज कर दी थी. एकलपीठ ने कहा था कि सरकार इस तरह का निर्णय लेने के लिए सक्षम है. इसके बाद एकलपीठ के आदेश को डबल बेंच की खंडपीठ में चुनौती दी गयी है.

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सत्ता व विपक्ष विधायक हैं छात्रों के समर्थन में 

परीक्षा स्थगित करने की मांग सत्तापक्ष और विपक्ष के विधायक विधानसभा में जोरदार ढंग से मांग कर चुके है. इसमें सत्ता पक्ष के शिवशंकर उरांव, राधा कृष्ण किशोर शामिल है. भाजपा मुख्य सचेतक राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि मामला जब कोर्ट में है तो आखिर मुख्य परीक्षा कैसे ली जा रही है. उन्होंने बाउरी कमेटी की रिपोर्ट सदन में रखने तथा उसपर चर्चा कराने की भी मांग की. उन्होंने पीटी में आरक्षण नहीं देने पर भी सवाल उठाया. वहीं विपक्षी दलों में कांग्रेस के सुखदेव भगत, जेवीएम के प्रदीप यादव, जेएमएम के हेमंत सोरेन, कुणाल षाड़ंगी प्रमुख हैं. हालांकि सरकार ने मामला कोर्ट में होने की बात कहते हुए बचने का प्रयास किया था. स्वंय मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इसपर मुख्य सचिव और कार्मिक सचिव के साथ बैठक कर युवाओं के हित में निर्णय लेने का आश्वासन सदन को दिया था. हालांकि, उनका निर्णय केवल आयोग के सचिव जगजीत सिंह के तबादले तक ही सीमित रहा है.

जनता के हित में सदन ले निर्णय:  गुमला विधायक 

इधर छठी सिविल सेवा मुख्य परीक्षा का मामला कोर्ट में होने के कारण सदन में कोई निर्णय नहीं होने पर विधायक शिवशंकर उरांव ने विधायिका की सर्वमान्यता पर चिंता करने की जरूरत बताई. कहा, न्यायिक अदालत और जनता की अदालत (विधानसभा) में कौन उच्च है, संविधान में उल्लेख है. सदन को जनता के लिए निर्णय लेना चाहिए. सरकार को बहाना नहीं समाधान ढूंढना चाहिए.

SP Jamshedpur 24/01/2020-30/01/2020

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