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JPSC पूछ रहा है दो साल पहले के सवाल, छिड़ी बहस कैसे सुरक्षित रह सकता है दो सालों तक प्रश्न पत्र

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Ranchi: लाख विवाद और हंगामे के बावजूद जेपीएससी की मेन्स परीक्षा जारी है. कोर्ट ने भी परीक्षा पर रोक लगाने से इंकार कर दिया. इस बीच बहस यह छिड़ गयी है कि जेपीएससी दो साल पुराने प्रश्नपत्र पर परीक्षा ले रहा है. ऐसे में क्या गारंटी है कि पश्नपत्र लीक नहीं हुआ होगा. जेपीएससी के पेपर एक में हिंदी और अंग्रेजी का पेपर था. हिंदी के लिए जो सवाल आये, उसमें से एक सवाल में निबंध लिखने को कहा गया है. निबंध लिखने को लेकर पांच ऑप्शन दिये गये हैं. आखिरी ऑप्शन में कहा गया है कि झारखंड के 16 साल पर निबंध लिखें. परीक्षार्थी जैसे ही परीक्षा हॉल से बाहर आये, यह बात जंगल में आग की तरह फैली. लोगों के बीच चर्चा होने लगी कि यह सवाल दो साल तक क्या सुरक्षित था. क्या दो सालों में पेपर लीक नहीं हुआ होगा. परीक्षार्थियों में इस बात को लेकर गुस्सा देखा जा रहा है.

कहीं ना कहीं चूक हुई हैः राधा कृष्ण किशोर, मुख्य सचेतक, सत्ता पक्ष

मामले पर न्यूज विंग से बात करते हुए बीजेपी विधायक और झारखंड विधानसभा सत्ता पक्ष के मुख्य सचेतक ने कहा कि जो मुझे इसकी जानकारी है. जेपीएससी किसी भी परीक्षा के लिए दो-तीन सेट में प्रश्नपत्र तैयार करता है. छठी जेपीएससी परीक्षा के लिए दो-तीन सेट प्रश्नपत्र तैयार किया गया होगा. एक सेट प्रश्नपत्र पूछा होगा बाकी दो रख दिया होगा. जेपीएससी को हर बार के लिए नया और अपडेट प्रश्नपत्र तैयार करना चाहिए. दो साल पहले जेपीएससी ने प्रश्नपत्र तैयार किया है. उसी में से एक सेट निकाल कर प्रश्नपत्र बांटा गया होगा. अगर ऐसा हुआ है तो जेपीएससी को देखना था कि दो साल पहले जो प्रश्नपत्र तैयार किया गया था वो अभी के लिहाज से अपडेट है कि नहीं. यह जेपीएससी ने देखा नहीं. ऐसा लगता है कि कहीं ना कहीं चूक हुई है.

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जेपीएससी भी चाहता है कि रघुवर सरकार के बीते दो सालों की बात छात्र याद ना रखेः कुणाल षाडंगी, जेएमएम विधायक  

मामले पर बरहागोड़ा से जेएमएम विधायक कुणाल षाडंगी ने कहा कि जेपीएससी भी चाहता है कि रघुवर सरकार के बीते दो सालों का कामकाज छात्र याद नहीं रखें. इन दो सालों में सरकार ने सीएनटी और एसपीटी एक्ट में संशोधन करना चाहा, लेकिन उसे बैकफुट पर आना पड़ा. दारू सरकार खुद बेचने लगी. लेकिन वापस पहली नीति पर आना पड़ा. स्कूल विलय का आदेश दिया. लेकिन उसे भी अब रोक दिया. स्थानीयता नीति को गलत तरह से परिभाषित किया. ये सारे काम रघुवर दास की सरकार ने पिछले दो साल में किये हैं. इसलिए जेपीएससी भी चाहता है कि सरकार इसको याद नहीं रखे. दूसरी तरफ से इस बात की कौन गारंटी लेगा कि दो सालों तक प्रश्नपत्र सुरक्षित था, लीक नहीं हुआ.

कमियां हो सकती हैं, लेकिन 27000 बच्चों को परीक्षा देने से आप नहीं रोक सकतेः बिरंची नारायण, बेजीपी विधायक

मामले पर न्यूज विंग से बात करते हुए बोकारो से बीजेपी विधायक बिरंची नारायण ने कहा कि परीक्षा लेने की प्रक्रिया में गलतियां हो सकती हैं. कमियां हो सकती हैं इस बात से इंकार नहीं है. लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि 27,000 बच्चे जो परीक्षा दे रहे हैं, उनको परीक्षा देने से वंचित कर दिया जाये. इसके अलावा कहीं कुछ कमी है तो उसको सुधारा जाये.

यूपीए की सरकार बनी तो रद्द होगी छठी जेपीएससी मेन्स परीक्षाः सुखदेव भगत, कांग्रेस विधायक

मामले पर न्यूज विंग से बात करते हुए कांग्रेस के विधायक सुखदेव सिंह ने कहा कि इससे जेपीएससी मुख्य परीक्षा की निष्पक्षता व गोपनीयता पूरी तरह गलत साबित हुई. पहले यह पेपर केवल 5100 अभ्यर्थियों के लिए बना था. जब सीएम ने 35,000 रिजल्ट प्रकाशन का आदेश आयोग को दिया, तो आयोग ने भी इसी पेपर को और अधिक संख्या में प्रिंट करा दिया. जिस तरह से आयोग की कार्यशैली पर सवाल उठा है, उससे साबित होता है कि विगत दो साल तक पेपर को पूरी गोपनीयता से नहीं रखा गया. परीक्षा लेने का मुख्य उद्देश्य यही है कि कैसे सत्ता में बैठे लोगों के रिश्तेदारों को बैकडोर एंट्री से अधिकारी बनाया जाये. विधायक सुखदेव भगत ने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव जल्द है. अगर राज्य में यूपीए की सरकार बनती है, तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करेगी. वहीं परीक्षा में किसी तरह की अनियमितता बरती गयी है, तो इसे रद्द करने में सरकार पीछे नहीं रहेगी.

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