
Nitesh Ojha
Ranchi : राज्य गठन के बाद से ही विवादों में रहा झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) एक बार फिर चर्चा में है. यह चर्चा छठी सिविल सेवा परीक्षा में कथित धांधली को लेकर है.
आपको बता दें कि यह परीक्षा उसी समय से विवाद में रही है, जब इसकी प्रारंभिक परीक्षा का रिजल्ट जारी किया गया था. यानि फरवरी 2016 से ही.
पूर्ववर्ती रघुवर सरकार के समय विज्ञापन से उलट हजारों छात्रों को पास कराने से परीक्षा की काफी किरकिरी हुई थी. अब इसका फाइनल रिजल्ट जारी हो गया है. लेकिन विवाद लगातार जारी है.
परीक्षा में शामिल हुए कई छात्रों का आरोप है कि पेपर 1 जो कि विज्ञापन के मुताबिक क्वालीफाइंग मार्क्स का पेपर है, उसे भी मैरिट लिस्ट में जोड़ दिया गया है, जो कि विज्ञापन के विरुद्ध है.
वहीं सभी कैटेगरी से छात्रों के अंतिम चयन के लिए आयोग ने मार्क्स तय किया है. इसके बावजूद एक छात्र जिसने आयोग द्वारा तय किये मार्क्स से कम अंक हासिल किया है, उसका भी चयन वित्त सेवा में किया गया है.
हालांकि जेपीएससी के अधिकारी छात्रों की इस बात से सहमत नहीं है. उन्होंने छात्रों के आरोप को निराधार बताया है. छात्रों का आरोप आयोग के परीक्षा नियंत्रक के प्रिंटिग में गलती से हुए एक छात्र के बयान को लेकर भी है.
हालांकि छात्रों के विरोध को देख आयोग ने EBC- 1 छात्रों के चयन के लिए पूर्व में तय अर्हता मार्क्स को संशोधित कर दिया है.
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क्वालीफाइंग मार्क्स को मेरिट लिस्ट में जोड़ना गलत
छात्रों का आरोप है कि छठी सिविल सेवा परीक्षा के विज्ञापन में इस बात का जिक्र था कि पेपर 1 यानि हिंदी और अंग्रेजी के पेपर को मुख्य परीक्षा में उपस्थित छात्रों को केवल क्वालीफाई करना था.
पांचवी सिविल सेवा परीक्षा के विज्ञापन में भी इस बात का जिक्र था. जाहिर है छात्र यही समझे होंगे कि इसमें केवल क्वालीफाई करना है.
लेकिन अब छठी सिविल का फाइनल रिजल्ट जारी हुआ है तो इसमें साफ दिख रहा है कि क्वालीफाइंग मार्क्स को भी मेरिट लिस्ट में जोड़ा गया है, जो कि छात्रों के मुताबिक विज्ञापन के खिलाफ है.
कम मार्क्स लाकर भी EBC (Annex -1) कैटेगरी के छात्र का चयन वित्त सेवा में



इसी तरह से छात्रों ने आयोग पर धांधली का आरोप लगाते हुए पास हुए एक छात्र का रिजल्ट भी न्यूज विंग को उपलब्ध कराया है.
कहा गया है कि यह मार्कशीट एक सिलेक्टेड कैंडिडेट का है और वह EBC (Annex -1) कैटेगरी का है. EBC (Annex-1) कैटेगरी का कटऑफ 594 है और इस कैंडिडेट का नंबर 593 आया है तो इनका सिलेक्शन किस बेसिस पर हुआ है? इस छात्र को अंतिम रूप से वित्त सेवा के लिए चयनित किया गया है.
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आयोग ने बदला EBC-1 का कट ऑफ मार्क्स


छात्रों के लगातार धांधली के आरोप को देखते हुए आयोग ने EBC -1 के पहले तय किये कट ऑफ मार्क्स में संशोधन कर दिया है.
आयोग की वेबसाइट पर भी देखा जा सकता है. पहले इस कटेगरी के लिए मार्क्स 594 था. लेकिन अब इस संशोधित कर 593 कर दिया गया है.
निराधार है छात्रों का आरोप : ज्ञानेंद्र कुमार
क्वालीफाइंग मार्क्स को भी मैरिट लिस्ट में जोड़ने के छात्रों के आरोप को परीक्षा नियंत्रक ज्ञानेंद्र कुमार ने बेबुनियाद बताया है. उनका कहना है कि विज्ञापन की शर्तों के अनुसार ही नियुक्ति परीक्षा होती है.
छठी सिविल सेवा के विज्ञापन में मुख्य परीक्षा का पूर्णांक 1050 था. इसका अर्थ है कि हिंदी-अंग्रेजी के अंकों को जोड़ा जाना था. ऐसा नहीं रहता तो पूर्णांक 950 रहता.
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