
Ranchi: झारखंड देश का पहला राज्य बन जायेगा जहां टीबी और इंडस्ट्रीज के लिए कोई पॉलिसी होगी.
सोमवार को कैपिटल हिल में टीबी वर्क प्लेस पॉलिसी के लिए राज्य स्तरीय कंसलटेंसी कार्यक्रम का आयोजन किया गया जहां टीबी वर्क प्लेस पॉलिसी पर विचार विमर्श किया गया. इसमें इंडस्ट्रीज के प्रतिनिधि और डॉक्टर्स शामिल हुए.
इसकी जानकारी देते हुए राज्य टीबी अधिकारी डॉ राकेश दयाल ने बताया कि यह पॉलिसी सभी औद्योगिक कारखानों में लागू की जायेगी. फिलहाल तीन औद्योगिक कारखानों में यह पॉलिसी लागू की गयी जिनमें उषा मार्टिन, जिंदल और आधुनिक हैं.
डॉ दयाल ने बताया कि इस पॉलिसी के तहत सभी औद्योगिक कारखानों को अनिवार्य रूप से इसे लागू करना होगा. ऐसे में कंपनियां खुद से तय कर सकती हैं कि कितने दिन में सभी कारखाना कर्मियों (मजदूर सहित) की टीबी की जांच की जाये.
साथ ही इसकी रिपोर्ट डीटीसी या एसटीओ को देनी होगी और सरकार को भी इसकी जानकारी देनी होगी. पॉलिसी बनाने में स्वास्थ्य विभाग के साथ नेशनल हेल्थ मिशन और रीच का योगदान रहा.
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शारीरिक के साथ सामाजिक बीमारी है टीबी
स्वास्थ्य सचिव नितिन मदन कुलकर्णी ने कहा कि टीबी एक ऐसी बीमारी जो सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि समाजिक भी है. इसके शारीरिक होने से दर्द तो बहुत है जिसे टीबी ग्रस्त लोगों ने समझा.
सामाजिक इसलिए कहा जा रहा है कि समाज में इसके लिए कई तरह के विचार बने हुए हैं. लोग टीबी ग्रस्त लोगों को भेद भाव की नजर से देखते हैं.
उन्होंने कहा कि खनन क्षेत्र इसका फोकस इसलिए है कि इस क्षेत्र में लोग सबसे अधिक एक दूसरे के संपर्क में आते है. वहीं कुपोषण के कारण लोगों का टीबी ग्रस्त होना भी काफी आसान है.
पॉलिसी के बारे में बताते हुए इन्होंने कहा कि पॉलिसी काफी सहज और सरल है जिसे आसानी से लागू किया जा सकता है.
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2020 को अभियान के रूप में लें
श्रम विभाग के सचिव राजीव अरुण एक्का ने बताया कि 2020 को एक अभियान के रूप में लें. राज्य में कई कंपनियां है. इनमें स्टोन क्रसिंग की कंपनियां प्रमुख हैं.
ऐसे में इन कंपनियों में इस पॉलिसी को लागू किया जाना चाहिए क्योंकि इन क्षेत्रों में लोगों को लंग्स संबधी बीमारी होने की आंशका अधिक होती है.
पॉलिसी के लागू होने के बाद यह कंपनी प्रबंधन के ऊपर होगा कि वह कितने समय अंतराल में कर्मचारियों का चेकअप करेगी.
वहीं रीच के दिवाकर शर्मा ने बताया कि कंसलटेंसी आयोजित करने का उद्देश्य पॉलिसी में किसी तरह की आपत्ति होने पर उसमें संशोधन करना है, लोगों के विचार जानना है.
इस दौरान रीच की ओर से तीन साल की इंपैक्ट रिपोर्ट भी जारी की गयी.
मौके पर रीच की एनएचएम मिशन डायरेक्टर शैलेश चौरसिया, प्रोजेक्ट डायरेक्टर स्मृति कुमार, मेडिकल ऑफिसर रीच डॉ पंकज डींगरा समेत अन्य लोग उपस्थित थे.
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