
Ranchi : झारखंड में सत्तारूढ़ रघुवर सरकार अपने शासन के पांच वर्षों में विकास के लंबे–लंबे दावे करती है. डबल इंजन की सरकार पिछले कई वर्षों से कहती रही है कि पांच वर्षों में राज्य का जैसा विकास हुआ, वैसा पिछले 14 वर्षों के दौरान नहीं हुआ था.
राज्य सरकार ने इसका श्रेय नगर विकास विभाग विकास को देने से भी परहेज नहीं किया. विभागीय मंत्री एक बार फिर रांची विधानसभा से चुनाव लड़ रहे हैं.
लेकिन अगर केवल राजधानी में ही विभागीय कार्यों की समीक्षा की जाये, तो सरकार के दावों का खोखलापन उजागर हो जाता है. विभाग की उपलब्धि मानी जाने वाली कई योजनाओँ की जमीन हकीकत ये है कि वे जमीन पर उतरी ही नहीं.
इसमें कांटाटोली और हरमू प्लाईओवर का निर्माण, हरमू नदी का सौंदर्यीकरण, विवेकानंद प्रतिमा और बड़ा तालाब का सौंदर्यीकरण, इलेक्ट्रिक विद्यूत शवदाह गृह का निर्माण प्रमुख हैं.
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हरमू नदी : सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट पर खर्च 84 करोड़, हालत बड़े नाले जैसी
बात अगर हरमू नदीं के सौंदर्यीकरण की करें, तो विभागीय अधिकारियों के मुताबिक पांच वर्षों में इसपर करीब 84 करोड़ रूपये खर्च हो चुके हैं. यह कहने में कोई परहेज नहीं है कि राजधानी रांची की जीवन रेखा कही जानेवाली हरमू नदी का सौंदर्यीकरण मुख्यमंत्री रघुवर दास का ड्रीम प्रोजेक्ट है.
विभाग इसपर अबतक 84 करोड़ रुपये खर्च कर चुका है. लेकिन, इसका कोई सही परिणाम अबतक नहीं दिखा है. हालत यह है कि आज भी हरमू नदी किसी बड़े नाले जैसी ही दिखती है.
माना जाये तो इसके लिए विभागीय अधिकारियों सहित रांची जिला प्रशासन, रांची नगर निगम, विभागीय एजेंसी जुडको सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं.
रातू रोड फ्लाइओवर : बीजेपी के गढ़ में लोगों का विरोध देख रोका गया काम
राजधानी के दो प्लाईओवर (हरमू और रातू रोड) की बात करें, तो विभागीय मंत्री ने इन्हें अपने विकास के एजेंडे में प्रमुखता से रखा था.
रातू रोड फ्लाईओवर के निर्माण में विभाग को स्थानीय लोगों के विरोध का काफी सामना करना पड़ा. इसके लिए भूमि अधिग्रहण की समस्या सबसे प्रमुख थी.
बीजेपी के गढ़ कहे जाने वाले क्षेत्र के लोगों के विरोध को देखते हुए विभाग ने कई बार अपना निर्णय बदला.
इस वर्ष मार्च माह में ही रातू रोड प्लाईओवर निर्माण का काम शुरू होना था. लेकिन एनएचएआई के तरफ से कई बार टेंडर खोलने की तिथि तय की, लेकिन किसी न किसी कारण से उसे रद्द कर दिया गया.
अब टेंडर का काम पूरा होने के बाद ही यह तय हो पायेगा कि प्लाईओवर का काम कब शुरू होगा.
दूसरी ओर कांटाटोली प्लाईओवर का निर्माण आनन-फानन में शुरू तो हुआ, लेकिन काम शुरू कर इसे रोक दिया गया.
जब इसकी जानकारी जुडको से ली गयी, तो कहा गया कि प्लाईओवर निर्माण खर्च में बढ़ी संशोधित राशि की अनुमति नहीं दिये जाने के बाद काम को रोका गया है.
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बड़ा तालाब के सौंदर्यीकरण का काम कब पूरा होगा, इसकी जानकारी नहीं
राजधानी रांची की पहचान रहे बड़ा तालाब के सौंदर्यीकरण और इसके बीच बने विवेकानंद टापू का काम भी पिछले कई महीनों से लंबित है.
मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इस वर्ष 12 जनवरी को विवेकानंद प्रतिमा का अनावरण किया था. उस वक्त कहा गया था कि आम लोगों के लिए यह स्थल मई माह में खोल दिया जायेगा. तालाब के चारों तरफ चहारदीवारी निर्माण कर सौंदर्यीकरण का काम भी जल्द करने का दावा किया गया था.
लेकिन जमीनी हकीकत यही है कि दोनों ही काम अभी भी जारी हैं. काम कब पूरा होगा, इसकी जानकारी देने में कोई अधिकारी या नगर विकास मंत्री समर्थ नहीं है.
इलेक्ट्रिक शवदाह गृह : जिम्मा नहीं लेना चाह रही मारवाड़ी सहायक समिति
इसी तरह रांची नगर क्षेत्र में स्थित विद्युत शवदाह गृह के संचालन का काम किसी निजी एजेंसी को दिये जाने का मामला भी काफी विवादित रहा.
राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ने कई बार इसे मारवाड़ी सहायक समिति को दिये जाने की बात प्रमुखता से रखी. लेकिन निगम ने इसपर कोई विशेष रूचि नहीं दिखायी.
अपने उपर बढ़ते दबाव को देख आखिरकार निगम के बोर्ड ने इसके प्रस्ताव पर सहमति तो ली लेकिन समिति शवदाह गृह को अपने अंडर नहीं ले पायी है.
बताया जा रहा है कि आसपास अवैध अतिक्रमण, बिजली बिल का बकाया इसे नहीं लिये जाने के प्रमुख कारण हैं.
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