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#Jharkhand: विभाग को दिव्यांजनों का आंकड़ा मालूम नहीं, 5 सालों में उपकरणों की खरीद पर 14.27 करोड़ खर्च

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Ranchi : झारखंड के समाज कल्याण, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग को राज्य में दिव्यांगजनों की संख्या मालूम नहीं है. फिर भी उनके कल्याणकारी कार्यक्रमों के लिए उसने 2014-15 से 2019-20 के दौरान 14 करोड़ से भी अधिक राशि जारी की है.

दिव्यांगों के लिए विशेष उपकरण ख़रीदे जाने के नाम पर उसने सभी जिलों को ये पैसे दिये. हालांकि इसके बारे में अलग अलग जिलों में दिव्यांगजनों को तरीके से पता भी नहीं है.

ऐसे में सभी जिलों में उन दिव्यांगजनों को बेहद परेशानी का सामना लगातार करना पड़ रहा है जिन्हें कृत्रिम अंगों या विशेष उपकरणों की जरुरत है. विवश होकर उन्हें दूसरे राज्यों में भटकना मज़बूरी हो चुकी है.

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आरटीआइ से मिली जानकारी के अनुसार राज्य में 6 जिला पुनर्वास केंद्र हैं जिसके जरिये दिव्यांगजनों के लिए विशेष उपकरण बनाये जाने और जरुरतमंदों को दिये जाने की व्यवस्था है. पर विभाग के अनुसार इनमें से 2 को छोड़कर शेष क्रियाशील हैं.

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आरटीआइ के जरिये विशेष उपकरणों की खरीद का मांगा गया हिसाब

आरटीआइ एक्टिविस्ट और दिव्यांगजनों के लिए लगातार प्रयासरत हजारीबाग के गणेश कुमार वर्मा ने फ़रवरी, 2020 में समाज कल्याण विभाग से एक आवेदन देकर दिव्यांग छात्रों के लिए खोले गये स्कूल, टीचिंग, नन टीचिंग स्टाफ और 2016-17 से इस कार्य में व्यय राशि की जानकारी मांगी थी.

आवेदन में यह भी पूछा गया था कि दिव्यांगों के लिए चलायी जा रही योजनाओं और उसके लिए पिछले पांच वर्षों में आवंटित की गयी राशि से संबंधित जानकारी दें.

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ऐसे संस्थान जो दिव्यांगों को शिक्षित करने तथा अन्य कार्यों में सहयोग कर रहे हैं, उनके नाम और राज्य सरकार द्वारा 2014-15 से 19-20 के बीच प्रदान की गयी आर्थिक सहायता संबंधी जानकारी दी जाये.

गणेश के अनुसार विभाग ने महीने भर बाद उसे (पत्रांक 453, दिनांक 12 मार्च) आधी अधूरी और भ्रामक सूचनाएं दी हैं.

विशेष उपकरणों की खरीद के लिए आवंटित हुए 14 करोड़ 27 लाख

समाज कल्याण विभाग ने गणेश कुमार के आवेदन पर दिव्यांग जनों के लिए विशेष स्कूल और शिक्षकों के संबंध में तो नहीं बताया. यह जानकारी दी कि राज्य योजनान्तर्गत विशेष उपकरण खरीदने के लिए जनजातीय, अनुसूचित जाति विशेष अंगीभूत योजनान्तर्गत 2014-15 से 19-20 के दौरान अलग अलग जिलों को 14 करोड़ 27 लाख रुपये दिए जा चुके हैं.

साथ ही यह भी बताया कि विभाग के पास जिलावार दिव्यांगों की कुल संख्या की सूची नहीं है. विभाग ने आरटीआइ में दी गयी जानकारी में यह भी बताया है कि राज्य में 6 जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र हैं.

इनमें रांची, हजारीबाग, पूर्वी सिंहभूम, दुमका, धनबाद और पलामू में एक-एक जिला दिव्यांग केंद्र हैं. रांची का दिव्यांग केंद्र 2001 में स्थापित हुआ था जो क्रियाशील नहीं है. पूर्वी सिंहभूम का दिव्यांग केंद्र भी सक्रिय नहीं है जबकि अन्य चार कार्यरत हैं.

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विशेष उपकरणों की खरीद में गड़बड़ी

गणेश कुमार वर्मा के मुताबिक जिलावार दिव्यांगों की कुल संख्या की सूचना समाज कल्याण विभाग के पास नहीं है.

हजारीबाग जिले को वित्तीय वर्ष 14-15 से लेकर वर्ष 19-20 तक में दिव्यांगों को विशेष उपकरण उपलब्ध कराने के लिए कुल 62 लाख 50 हजार रुपये की राशि दी गयी है.

इस जिले में कितने दिव्यांग हैं, उसकी सूची विभाग के पास उपलब्ध नहीं हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि विशेष उपकरणों की खरीदारी की आधार पर हुई है और किन किन दिव्यांगों को इसका लाभ दिया गया.

हजारीबाग का जिला दिव्यांग केंद्र बिल्कुल डेड पड़ा है और विभाग इसे क्रियाशील कह रहा. गणेश के अनुसार यह दिव्यांगजनों दिव्यांग्जनों के साथ अन्याय है.

दिव्यांगजनों के लिए बने राज्य निःशक्तता आयोग की प्रासंगिकता पर सवाल भी खड़ा करता है. राज्य में जिला दिव्यांग पुनर्वास केन्द्रों को 6-7 सालों से केंद्र से सालाना मिलने वाले लगभग 2 करोड़ की राशि नहीं मिल रही.

समाज कल्याण विभाग आखिर विशेष उपकरण खरीदने को दिव्यांग केन्द्रों को पैसा नहीं दे रहा तो आखिर वह कहां दे रहा. पैसे का उपयोग वास्तव में पारदर्शी तरीके से होता तो आज विकलांग जनों को विशेष उपकरणों के लिए भटकना नहीं पड़ता.

राज्य में हैं 5 लाख दिव्यांग

राज्य निःशक्तता आयुक्त सतीश चन्द्र के अनुसार राज्यभर में लगभग 5 लाख दिव्यांग हैं. इनमें से 2 लाख लोगों को पेंशन योजना का लाभ मिल रहा. हर साल सिविल सर्जन कार्यालयों से विकलांगों का आंकड़ा उनके पास पास आता है.

हालांकि कुछ जिलों में कतिपय कारणों से विलंब हो जाता है. निःशक्तता आयोग दिव्यांगजनों की समस्या के निदान के लिए तत्पर रहता है. कोई शिकायत किसी को हो तो वह आयोग में संपर्क कर सकता है.

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