Education & CareerJharkhand

झारखंड: चार यूनिवर्सिटी खुद दे रहे शिक्षक और कर्मचारियों को वेतन, बढ़ रहा है बोझ   

Ranchi : राज्य में विश्वविद्यालयों का गठन तो कर दिया जा रहा है. लेकिन इनका वहन सरकार नहीं कर पा रही है. तभी तो बीते चार महीने से राज्य के चार विश्वविद्यालयों को उच्च शिक्षा विभाग की ओर से फंड नहीं दिया गया. यह फंड विश्वविद्यालय के शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मियों को देने के लिए दिया जाता है. इन छह विश्वविद्यालयों में कोल्हान विश्वविद्यालय, निलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय, विनोबा भावे विश्वविद्यालय और डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय हैं.

इन विश्वविद्यालयों में पिछले चार माह से विश्वविद्यालय अपने ही फंड से शिक्षकों और कर्मचारियों को वेतन दे रही है. जिससे विश्वविद्यालयों पर बोझ बढ़ रहा है. सूत्रों से जानकारी मिली है कि राज्य में छह विश्वविद्यालय बनने के बाद से ऐसी स्थिति आयी है. जबकि कई बार शिक्षकों और कर्मचारियों का वेतन कम या बकाया में चला जा रहा है.

इसे भी पढ़ें – सिर्फ गिनाती रहीं लुईस मरांडी उपलब्धियां, मगर हज कमेटी पुर्नगठन के सवाल पर साधी चुप्पी 

दो विश्वविद्यालय को मिल चुके हैं पैसे

उच्च शिक्षा विभाग की ओर से विश्वविद्यालय को पैसे दिये जाते हैं. बीते माह रांची विश्वविद्यालय और सिद्धो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय को विभाग की ओर से पैसे दिये जा चुके हैं. इन विश्वविद्यालयों को भी विभाग की ओर से तीन माह बाद राशि आवंटित की गयी. जानकारी मिली है कि लंबे समय तक विश्वविद्यालयों के फंड रोकने की जानकारी कई बार विभाग के संबधित अधिकारियों को दी गयी. लेकिन इसके बाद भी विभाग की ओर से राशि नहीं दी जा रही है. जबकि राज्य में लगभग सात हजार शिक्षकों और शिक्षेकत्तर कर्मियों की संख्या है.

हर माह यूनिवर्सिटी को मिलते हैं एक करोड़

डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ एसएन मुंडा ने जानकारी दी कि पिछले चार माह से विभाग की ओर से फंड रूका हुआ है. विश्वविद्यालय की ओर से अपने मद से शिक्षकों समेत अन्य खर्चों का वहन किया जा रहा है. इन्होंने जानकारी दी कि प्रत्येक माह विश्वविद्यालय को लगभग एक करोड़ से अधिक फंड दिया जाता है. ऐसे में परेशानी काफी बढ़ गयी है.

ट्रेजरी में है बिल, भुगतान में लगने वाले समय की जानकारी नहीं

इस संबध में उच्च शिक्षा विभाग के सचिव राजेश कुमार शर्मा ने जानकारी दी कि बिल ट्रेजरी में है. चार माह से इन विश्वविद्यालयों को फंड नहीं दिया गया है. टेªजरी में कितना समय में लगेगा इसकी जानकारी नहीं है. लेकिन प्रक्रिया जारी है. हर विश्वविद्यालय को उनके संसाधन, शिक्षक, कर्मचारी, छात्र समेत अन्य चीजों को देखते हुए ही फंड दी जाती है.

इसे भी पढ़ें – CNT उल्लंघन मामले में कल्पना सोरेन और जमीन बेचने वाले राजू उरांव को नोटिस

Related Articles

Back to top button