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जानिए उन विधायकों को जिन्होंने #BJP के उम्मीदवार को हराया और बन गए भाजपायी, अब टिकट को लेकर रार

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Akshay Kumar Jha

Ranchi: आज-कल राजनीति वही अच्छी जिससे सत्ता सुख मिले. जिसके लिए चाहे भले ही पुराने कार्यकर्ताओं और उम्मीदवारों की बलि चढा दी जाए. खास कर अपने-आप को दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी क्लेम करने वाली पार्टी बीजेपी का यही मानना है. 2014 के विधानसभा चुनाव के बाद इस बात से गुरेज नहीं किया गया कि जो विधायक बीजेपी के उम्मीदवारों को ही हरा कर जीते थे. सरकार बनाने के लिए उन्हें पार्टी में शामिल करा लिया गया.

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सत्ता के जादूयी आंकड़े तक पहुंचने के लिए पुराने दिग्गजों से साइड कराकर मंत्री पद का पोफ्राइल भी दे दिया गया. लेकिन अब इस बात पर सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या इस बार बीजेपी वैसे विधायकों को दोबारा टिकट देगी, जो उन्हीं के उम्मीदवारों को हरा कर विधायक बने और फिर भाजपायी भी हो गए.

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जानिए उन विधायकों को

हटियाः 2009 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए गोपाल शरण नाथ शाहदेव ने बीजेपी के रामजी लाल सारडा को काफी कम अंतर से हरा कर विधायक बने. 2012 में गोपाल शरण नाथ शाहदेव के निधन के बाद 2012 में आजसू के टिकट पर लड़ते हुए नवीन जायसवाल ने जेवीएम के अजय नाथ शाहदेव को 11,884 वोट से हरा कर उपचुनाव जीत लिया.

दो साल के बाद दोबारा से आजसू की तरफ से टिकट ना मिलने पर जेवीएम के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए नवीन जायसवाल ने बीजेपी की सीमा शर्मा को करीब 8000 वोट से हराया.

लेकिन चुनाव जीतने के बाद नवीन जायसवाल ने जेवीएम का साथ छोड़ दिया और बीजेपी में शामिल हो गए. छह साल तक लगातार बीजेपी में रहने के बाद अब  उनके सामने सबसे बड़ी परेशानी यह है कि वो बीजेपी की टिकट से चुनाव लड़ सकेंगे या नहीं.

क्योंकि बीजेपी की तरफ से सीमा शर्मा भी चुनाव लड़ने को लेकर अभी तक पूरी ताकत झोंक चुकी है. शहर में लगे बैनर और पोस्टर इस बात का सबूत हैं.

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चंदनकियारीः झारखंड राज्य में यह एक ऐसा विधानसभा होने जा रहा है जहां का चुनाव काफी रोचक होगा. अगर आजसू और बीजेपी के बीच गठबंधन होता है, तो निश्चित तौर पर बीजेपी के उम्मीदवार अमर बाउरी होंगे. जबकि आजसू चाहेगी कि उनके मंत्री उमाकांत रजक वहां से चुनाव लड़े. इस सीट को लेकर आगे दोनों पार्टी में काफी जिच देखी जा सकती है. 2009 में उमाकांत रजक आजसू की टिकट पर लड़ते हुए अमर कुमार बाउरी को 3517 वोट से हराया था.

2014 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी और आजसू से गठबंधन के तहत यहां आजसू को सीट मिली थी. लेकिन जेवीएम के सिंबल से चुनाव लड़ रहे अमर बाउरी ने उमाकांत रजक को 34,164 वोट से हरा दिया. चानव जीतने के बाद अमर बाउरी ने जेवीएम का साथ छोड़ दिया और भाजपायी हो गए. ऐसे में अब यह कर पाना मुश्किल हो रहा है कि आखिर चंदनकियारी से चुनाव किस पार्टी का उम्मीदवार लड़ेगा. हालांकि विधानसभा क्षेत्र में उमाकांत बाउरी के खिलाफ जमकर बरस रहे हैं.

 

सारठः 2005 में उदय शंकर सिंह राजद के सिंबल पर चुनाव लड़ते हुए जेएमएम के शशांक शेखर भोक्ता को 14906 वोट से हराया. 2009 में जेएमएम के सिंबल पर चुनाव लड़ते हुए शशांक शेखर भोक्ता ने कांग्रेस के टिकट पर लड़ रहे उदय शंकर सिंह को 9420 वोट से हराया. 2014 में तीसरी बार पार्टी बदसलते हुए उदय शिकर सिंह बीजेपी के सिंहल से चुनाव लड़ रहे थे और जेवीएम के सिंबल से चुनाव लड़ रहे रणधीर सिंह से 13901 वोट से हार गए.

बाद दूसरे जेवीएम विधायकों की तरह ही यह बीजेपी में शामिल हो गए और इन्हें मंत्री पद से नवाजा गया. लेकिन इस बार रणधीर सिंह को बीजेपी की तरफ से टिकट मिल जाए यह तय नहीं माना जा रहा है. रणधीर सिंह ने कई बार बीजेपी को अपना बागी तेवर दिखाया है. माना जाता है कि रणधीर सिंह से पार्टी काफी खुश नहीं है.

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बरकट्ठाः इस विधानसभा चुनाव में राजनीतिक एक ही परिवार के दो भाइयों के बीच होती है. दोनों घरानों के बीच रिश्ता तो नहीं जुड़ सका. लेकिन इत्तेफाक से राजनीतिक धराना एक हो गया. 2009 में बीजेपी के सिंबल पर चुनाव लड़ते हुए अमित कुमार यादव ने अपने रिश्तेदार जानकी प्रसाद यादव को जो जेवीएम से चुनाव लड़ रहे थे उन्हें करारी शिक्सत देते हुए 9368 वोट से हराया.

लेकिन दोबारा 2014 में बीजेपी के उम्मीदवार ऐसा दोहरा नहीं सके. वो जानकी प्रसाद यादव से 8207 वोट से हार गए. जीतने के बाद वो भी बाकी जेवीएम के विधायकों की तरह बीजेपी में शामिल हो गए. अब दोनों यादव पार्टी से टिकट की आस लेकर बैठे हुए हैं. देखना होगा कि पार्टी नए वाले यादव जी पर भरोसा करती है या पुराने वाले पर.

 

सिमरियाः गणेश गंझू 2009 में जेएमएम के उम्मीदवार हुआ करते थे. उन्हें जय प्रकाश सिंह भोक्ता की तरफ से जो जेवीएम के उम्मीदवार थे 8025 वोटों से हार मिली. लेकिन 2014 में गणेश गंझू जेवीएम के उम्मीदवार हो गए और उन्होंने बीजेपी के उम्मीदवार सुजीत कुमार भारती को 15,640 वोट से हरा कर कारारी हार दी.

लेकिन अब वो भाजपायी हो गए हैं. इस सीट पर भी बीजेपी की तरफ से टिकट को लेकर असली लड़ाई है. विधायकों की जीत या हार की बात बाद में होगी, पहले यहां टिकट की लड़ाई है.

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