Uncategorized

चुनावी बांड की वैध अवधि रह सकती है 15 दिन, दिशानिर्देश तैयार

News Wing
New Delhi, 12 December:
राजनीतिक दलों को चंदा उपलब्ध कराने की व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिये सरकार द्वारा प्रस्तावित चुनावी बांड की वैध अवधि को 15 दिन रखा जा सकता है. कम अवधि के लिये जारी करने से बांड के दुरुपयोग को रोकने में मदद मिलेगी. आधिकारिक सूत्रों के अनुसार चुनावी बॉंड के लिये दिशानिर्देश करीब करीब तैयार कर लिये गये हैं. वित्त मंत्रालय इन्हें देख रहा है और अंतिम रूप दे रहा है. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने चुनावी बांड की घोषणा वर्ष 2017-18 के बजट में की है. सूत्रों के अनुसार चुनावी बांड एक प्रकार के धारक बांड होंगे। जिस किसी के भी पास ये बांड होंगे वह इन्हें एक निर्धारित खाते में जमा कराने के बाद भुना सकता है. हालांकि यह काम तय अवधि के भीतर करना होगा.

इसे भी पढ़ें- सीएम रघुवर दास के दबाव में पार्टी अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुआ ने किया मुझे निलंबितः रविंद्र तिवारी

हर राजनीतिक दल का एक अधिसूचित बैंक खाता होगा

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि हर राजनीतिक दल का एक अधिसूचित बैंक खाता होगा. उस राजनीतिक दल को जो भी बांड मिलेंगे उसे वह उसी खाते में जमा कराने होंगे. यह एक प्रकार की दस्तावेजी मुद्रा होगी और उसे 15 दिन के भीतर भुनाना होगा अन्यथा इसकी वैधता समाप्त हो जायेगी. अधिकारी ने कहा कि बॉंड को कम अवधि के लिये वैध रखे जाने के पीछे उद्देश्य इसके दुरूपयोग को रोकना है साथ ही राजनीतिक दलों को वित्त उपलब्ध कराने में कालेधन के उपयोग पर अंकुश रखना है.

इसे भी पढ़ें- क्या सरकार ने मोमेंटम झारखंड, सरकार के 1000 दिन व माइनिंग शो के दौरान निगम क्षेत्र में बिना अनुमति लगाए थे बैनर-पोस्टर

चुनावी बांड के लिये नियमों को जल्द किया जाएगा जारी

अधिकारी ने कहा कि चुनावी बांड के लिये नियमों को जल्द ही जारी कर दिया जायेगा और इस तरह के बॉंड से जुड़ी कुछ अन्य जानकारी इस काम के लिये प्राधिकृत सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा जारी की जायेगी. चुनावी बांड एक प्रकार के प्रामिसरी नोट यानी वचनपत्र होंगे और इन पर किसी तरह का ब्याज नहीं दिया जायेगा. चुनावी बांड में राजनीतिक दल को दान देने वाले के बारे में कोई जानकारी नहीं होगी. ये बांड 1,000 और 5,000 रुपये मूल्य के होंगे.

इसे भी पढ़ें-शीतकालीन सत्र ऐसा जैसे शराब और चुंबन प्रतियोगिता के अलावा झारखंड में कोई मुद्दा ही ना हो

राजनीतिक चंदे की प्रक्रिया को साफ सुथरा बनाने की आवश्यकता

वित्त मंत्री ने बजट में चुनावी बांड की घोषणा करते हुये कहा था कि भारत में राजनीतिक चंदे की प्रक्रिया को साफ सुथरा बनाने की आवश्यकता है. चंदा देने वाले राजनीतिक दलों को चेक के जरिये अथवा अन्य पारदर्शी तरीकों से दान देने से कतराते हैं क्योंकि वह अपनी पहचान नहीं बताना चाहते हैं. उन्हें लगता है कि किसी एक राजनीतिक दल को चंदा देने पर उनकी पहचान सार्वजनिक होने का अंजाम उन्हें भुगतना पड़ सकता है. वित्त मंत्री ने तब कहा था कि सभी राजनीतिक दलों के साथ विचार विमर्श कर वह चुनावी बांड के लिये नियम तैयार करेंगे.

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

Back to top button