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ठेके के द्रोणाचार्यों के भरोसे ‘नीरज चोपड़ा’ तलाशने में जुटी झारखंड सरकार

Ranchi: झारखंड स्टेट स्पोर्ट्स प्रमोशन सोसाइटी (JSSPS) को होटवार स्थित खेल एकेडमी के लिये द्रोणाचार्यों (कोच) की तलाश है. इसके अलावा दूसरे पदों के लिये भी काबिल लोग चाहिये. इसके लिये विज्ञापन जारी किया गया है. 15 सितंबर तक योग्य अभ्यर्थियों से आवेदन मांगे हैं. कोच औऱ दूसरे पदों पर कॉन्ट्रैक्ट पर 3 सालों के लिये नियुक्ति का ऑफर दिया गया है. मसला यह उठ रहा है कि आखिर ठेके पर काम करने के लिये जो भी आयेंगे, वे शत-प्रतिशत देने में कितनी ईमानदारी दिखायेंगे. हर दो-तीन साल में कोचों की तलाश के भरोसे मिशन ओलंपिक का सपना कैसे पूरा होगा.

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क्या आती है समस्या

जेएसएसपीएस ने मिशन ओलंपिक का लक्ष्य तय किया है. अभी एकेडमी में लगभग 450 कैडेट्स हैं. 2028-2032 के ओलंपिक में वे देश के लिये वे पदक जीतें, इसका लक्ष्य बनाया गया है. पर मुश्किल यह है कि तीन-तीन सालों के लिये एकेडमी ज्वाइन करने वाले कोच आखिर ओलंपियन तैयार करने के लिये कैसे मोटिवेट होंगे. 2016-17 से जेएसएसपीएस (सीसीएल) ने एकेडमी के संचालन की जवाबदेही ली है. पहले टर्म में उसने अलग अलग खेलों में कोच, असिस्टेंट कोच और अन्य पदों पर लोगों को रखा था जिनमें से कई तीन साल पूरा होने से पहले दूसरे जगहों पर चले गये. कुछ ने टर्म पूरा होते ही दूसरे जगहों पर बेहतर मौके का लाभ उठा लिया.

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बीच समय में कोच बदले जाने से जूनियर कैडेट्स की तैयारियों पर असर पड़ता है. फिर से नये कोच के साथ तालमेल बनाने में समय लगता है. साइक्लिंग में कोच के लिये दो कोच ने पिछले टर्म में आवेदन किया था. पर ज्वाइनिंग से पहले ही दूसरे जगहों पर मौका मिलने पर निकल गये. इस तरह से इस खेल में रेगूलर कोच मिला नहीं. फूटबॉल के खिलाड़ियों को कोलकाता की एक एजेंसी के जरिये कोचिंग दी जा रही थी. एजेंसी 2-3 माह में कोच बदल देती थी. 3 कैडेट्स ने इससे तंग आकर एकेडमी ही छोड़ दी. ऐसे में फुटबॉल में एकेडमी का रिजल्ट कभी ढंग से नहीं दिखा. इसी तरह की समस्या और खेलों में आती रही.

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