
Soumitra Roy
इस साल मई के आरंभ में China की जनमुक्ति सेना (PLA) के लद्दाख और सिक्किम क्षेत्र में घुसने से चीन और भारत के बीच जो सीमा विवाद शुरू हुआ है, वह पिछले 4 सालों में चीन की सेना की तीसरी बड़ी घुसपैठ थी. इसके बावजूद Modi सरकार ने कोई खास विरोध नहीं किया है.
भारत सरकार ने Arunachal Pradesh में चीन की घुसपैठ के कई मामलों को नजरअंदाज किया है.
हालांकि मोदी सरकार नियमित रूप से औपचारिक प्रतिक्रिया जारी करती रही है. लेकिन गौर करने पर सवाल बनता है कि क्या भारत ने चीन की घुसपैठ पर चुप रहने की नीति अख्तियार कर रखी है?
पिछले साल नवंबर में अरुणाचल पूर्व निर्वाचन क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद तापिर गाओ ने इस मामले में केंद्र सरकार से हस्तक्षेप का अनुरोध किया था. उन्होंने कहा था कि चीन ने 56 किलोमीटर से अधिक भारतीय भूभाग अपने कब्जे में कर लिया है.
लेकिन भारत ने औपचारिक रूप से घुसपैठ की बात से इनकार किया था. और इसे लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) के बारे में दोनों देशों के अलग-अलग नजरिए का परिणाम बताया.
डोकलाम में चीन की उपस्थिति ने उसे भारतीय सीमा के नजदीक ला दिया है और उसे सिल्लिगुड़ी कॉरिडोर इलाके में मजबूत किया है. यह कॉरिडोर एक छोटी पट्टी है, जो भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को देश से जोड़ती है. इसके बावजूद भारत सरकार और मुख्यधारा के मीडिया ने तनाव कम होने का जश्न मनाया.
इस साल मई में पाकिस्तान से भारत घुस आने वाले एक कबूतर की चर्चा में भारतीय मीडिया ने चीन की घुसपैठ से ज्यादा समय खर्च किया.
हाल में जारी विवाद से यह संकेत मिलता है कि चीन की गतिविधियों पर मोदी सरकार की खामोशी ने उसे बल दिया है. लद्दाख स्वायत्त हिल विकास परिषद में शिक्षा के कार्यकारी काउंसलर कोनचोक स्टांजिन ने बताया है कि 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद पहली बार इलाके में चीन की सैन्य गतिविधि इतनी तीव्र हुई है.
न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित एक रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन ने उपमहाद्वीप में अपने भू-राजनीतिक प्रभाव को विस्तार दिया है. बढ़ते तनाव के बीच मई में चीन ने घोषणा की कि वह पाक अधिकृत कश्मीर में, जिसका दावा भारत करता है, बांध निर्माण में पाकिस्तान की मदद करेगा.
चीन में प्रकाशित खबरों के मुताबिक, चीन शानशी प्रांत से काठमांडू के लिए रेल सेवा शुरू करने जा रहा. यह घोषणा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे नेपाल की भारत पर निर्भरता कम होगी. साथ ही यह घोषणा भारत की सीमाओं को चुनौती देने वाले नेपाल के नये नक्शे के जारी होने के बाद आयी है.
भारत के दक्षिण में हिंद महासागर में चीन एक द्वीप में विकास कार्य कर रहा है, जो भारत की सीमा से मात्र 600 किलोमीटर की दूरी पर है. मालदीव ने दिसंबर 2016 में चीन को यह द्वीप 50 साल के लिए लीज पर दिया था. सैटेलाइट से प्राप्त तस्वीरों के अनुसार, फरवरी 2020 तक चीन ने इस इलाके को दोगुना बना लिया था.
इसके बावजूद नरेन्द्र मोदी प्रशासन और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने चुपचाप चीन की घुसपैठों को होने दिया है.




