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झारखंड प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों ने काला बिल्ला लगाया, विधि-व्यवस्था के काम में नहीं किया सहयोग

Ranchi : राज्य भर में झारखंड प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों ने बुधवार को काला बिल्ला लगाकर काम किया. अपने तय कार्यक्रम के मुताबिक 16 जनवरी से 20 जनवरी तक ये अधिकारी ऐसे ही काम करेंगे. काला बिल्ला लगाकर कार्यालय जायेंगे, दैनिक काम करेंगे, लेकिन विधि-व्यवस्था की अगर कहीं कोई समस्या आयी, तो वे सहयोग नहीं करेंगे. प्रखंड कार्यालय, जिला मुख्यालय से लेकर रांची स्थित सचिवालय में भी झारखंड प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को ऐसा ही करता देखा गया. हालांकि, खबर लिखे जाने तक राज्य भर से ऐसी कोई खबर नहीं आयी कि कहीं विधि-व्यवस्था को संभालने के लिए प्रशासनिक अधिकारी की जरूरत पड़ी हो और अधिकारी ने मना कर दिया हो. न्यूज विंग से बात करते हुए झालसा के अध्यक्ष राम कुमार सिन्हा ने कहा कि झारखंड के प्रशासनिक अधिकारी काला बिल्ला लगाकर अपनी मांगों को पूरा करने की मांग कर रहे हैं. विधि-व्यवस्था में सरकार का सहयोग नहीं किया जा रहा है.

क्या है डिमांड और क्या है ग्राउंड

डिमांड : सातवें वेतन आयोग की अनुशंसा को लागू करने के लिए गठित फिटमेंट कमिटी की झारखंड प्रशासनिक सेवा के लिए की गयी अनुशंसा को सरकार स्वीकार करे.

आधार : अधिकतर राज्यों में राज्य प्रशासनिक सेवा के मूल कोटि के पदाधिकारी को 8000-13500 का प्रतिस्थानी पीबी-III 15000-39000 GP 5400 का वेतनमान मिलता है. इन राज्यों में उत्तर प्रदेश, एमपी, राजस्थान, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और बिहार शामिल हैं.

डिमांड : झारखंड प्रशासनिक सेवा अंतर्गत संयुक्त सचिव के 120 पद हैं. झारखंड प्रशासनिक सेवा का प्रशासी विभाग नहीं होने के बावजूद ग्रामीण विकास विभाग ने उप विकास आयुक्त के 18 पदों में 3 भारतीय वन सेवा तथा 3 संविदा के लिए चिह्नित कर दिया. इसके कारण संयुक्त सचिव स्तर पर झारखंड प्रशासनिक सेवा के पदों की संख्या 120 से घटकर 114 हो गयी है. संघ की मांग है कि संयुक्त सचिव स्तर के अन्य 6 पदों की पहचान कर उसे झारखंड प्रशासनिक सेवा के लिए चिह्नित करने के साथ ही 02.05.2018 को गठित समिति की अनुशंसा के आलोक में झारखंड प्रशासनिक सेवा के बल का पुनर्गठन किया जाये. राज्य गठन के 18 सालों में सिर्फ एक बार ही कैडर रिव्यू 2014 में हुआ है.

आधार : संयुक्त सचिव के पहले से स्वीकृत 120 पदों में से 18 पद उप विकास आयुक्त के लिए स्वीकृत हैं. इन 18 पदों में से 3 पद भारतीय वन सेवा और 3 पद संविदा के आधार पर नियुक्ति के लिए ग्रामीण विकास विभाग के संकल्प से वापस ले लिये गये हैं. झारखंड प्रशासनिक सेवा नियमावली 2015 के नियम 3 के अनुसार “सेवा के अधिकृत संवर्ग बल का सृजन अथवा प्रत्यर्पण प्रशासी विभाग द्वारा किया जायेगा”. अब तक भारतीय वन सेवा के मात्र दो पदाधिकारियों का पदस्थापन उप विकास आयुक्त के पद पर किया गया है. लेकिन, अधिक दिनों तक पदस्थापित नहीं रहे. संविदा के आधार पर अब तक नियुक्ति नहीं की गयी है. सभी 6 पदों को फिर से वापस किया जा सकता है. साथ ही, झारखंड प्रशासनिक सेवा हेतु जरूरत के मुताबिक नये पदों का सृजन एवं चिह्नितीकरण के लिए कैडर रिव्यू समिति की बैठक भी आयोजित की जा सकती है.

डिमांड : झारखंड प्रशासनिक सेवा के पदाधिकारियों के सभी पद सोपान पर काफी संख्या में पद रिक्त हैं. संघ की मांग है कि सभी पद सोपान पर प्रोमोशन के लिए जल्द ही विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक आयोजित करने का निर्देश कार्मिक, प्रशासनिक सुधार और राजभाषा विभाग को दिया जाये.

आधार : विशेष सचिव, अपर सचिव एवं संयुक्त सचिव कोटि में प्रोमोशन दिया गया है. अपर समाहर्ता और समकक्ष कोटि में प्रोमोशन के लिए विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक निर्धारित थी. लेकिन, बिना किसी कारण बैठक स्थगित कर दी गयी और अभी तक दोबारा तारीख तय नहीं हुई है. इस बैठक का शीघ्र आयोजन बहुत जरूरी है. क्योंकि, इसके बाद ही मूल कोटि से अनुमंडल पदाधिकारी और समकक्ष पदों पर प्रोमोशन के लिए विभागीय प्रणाली समिति की बैठक आयोजित हो सकती है.

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