JharkhandMain SliderRanchi

ना टेंडर हुआ, ना कैबिनेट ने किया पास, फिर बिजली व्यवस्था संभालने का जिम्मा टाटा को ही क्यों देना चाहते हैं रघुवर दास

Akshay Kumar Jha

Ranchi: सीएम रघुवर दास ने मंगलवार को प्रोजेक्ट भवन में बिजली विभाग और टाटा के कुछ अधिकारियों के साथ बैठक की. बैठक के फौरन बाद आइपीआरडी ने प्रेस रिलीज जारी की, जिसमें सीएम रघुवर दास के हवाले से कहा गया कि जमशेदपुर के नोटिफाइड कमांड एरिया और सरायकेला खरसावां के ग्रामीण क्षेत्रों में टाटा स्टील और जुस्को बिजली व्यवस्था का काम संभालेंगी. लोगों को निर्धारित दर पर जुस्को के माध्यम से बिजली मिलेगी. इस संबंध में मुख्यमंत्री रघुवर दास के निर्देश पर झारखंड राज्य विद्युत बोर्ड और जुस्को के बीच समझौता करने का निर्णय लिया गया. आपसी सहमति के बाद दोनों पक्षों द्वारा समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे. इसके तहत जुस्को राज्य सरकार के इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल कर लोगों को बिजली उपलब्ध कराएगी. बैठक में ऊर्जा विभाग की सचिव वंदना डाडेल, प्रबंध निदेशक राहुल पुरवार, जुस्को के एमडी तरुण डागा मौजूद थे. बैठक के बाद अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर बिजली व्यवस्था संभालने का काम टाटा स्टील और जुस्को (Jamshedpur Utilities and Services Company, Venture of TATA)  को ही क्यों देना चाहती है रघुवर सरकार.

बिना टेंडर और नियम के ही कर दी घोषणा

Catalyst IAS
ram janam hospital

नियमों की बात करें तो वित्त नियामवली 235 में इस बात का साफ उल्लेख है कि कोई भी सरकारी योजना जो 1.5 लाख से ऊपर की है उसके लिए टेंडर करना है. वहीं नियमवली की धारा 245 में कहा गया है कि सरकार चाहे तो 235 को शिथिल कर सकती है. इसके लिए सरकार को उस योजना को कैबिनेट से पास कराना होगा. बिना कैबिनेट की मुहर के सरकार नियमावली 235 को शिथिल नहीं कर सकती है. लेकिन टाटा को बिजली व्यवस्था संभालने देने वाली घोषणा से पहले न ही सरकार ने 235 को शिथिल किया और न ही कैबिनेट से इसे पास कराया गया. कंपनी के साथ सिर्फ एक बैठक के बाद आनन-फानन में घोषणा कर दी गयी.

The Royal’s
Sanjeevani

टेक्निकल कमेटी ने रिपोर्ट से पहले ही कर दी घोषणा

वर्ल्ड बैंक और स्टेट बैंक इस पर स्टडी कर रहा है कि बिजली व्यवस्था प्राइवेट हाथों में देने का क्या नफा-नुकसान है. झारखंड में भी यह व्यवस्था बहाल करने की सरकार कोशिश कर रही है. इसके लिए बिजली बोर्ड की बैठक में एक कमेटी बनायी गयी है. कमेटी अभी मामले पर काम कर ही रही है. कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद यह तय किया जाना है कि कैसे बिजली व्यवस्था प्राइवेट प्लेयर्स को दी जाए. कमेटी की रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख होना है कि निजी हाथों में व्यवस्था देने की प्रक्रिया क्या होगी. लेकिन कमेटी की रिपोर्ट के बिना ही महज टाटा के अधिकारियों के साथ एक बैठक कर सरकार की तरफ से यह घोषणा कर दी गयी कि जमशेदपुर रिमोट एरिया और सरायकेला-खरसावां के ग्रामीण क्षेत्रों में टाटा स्टील और जुस्को बिजली व्यवस्था का काम संभालेंगी.

बोर्ड की बैठक अब महज एक औपचारिकता होगी

सरकार की तरफ से घोषणा होने के बाद अब सारी विभागीय कार्यवाही महज एक औपचारिकता हो जाएगी. बोर्ड की कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद रिपोर्ट को लेकर बिजली बोर्ड सीएमडी की अध्यक्षता में बैठक करता. बैठक में सारे पहलुओं पर चर्चा होने के बाद यह तय हो पाता कि बिजली व्यवस्था संभालने का काम किसे और कैसे दिया जाना है. बोर्ड के फैसले के बाद कैबिनेट में मामला जाता और वहां मुहर लगने के बाद ही कुछ तय हो पाता. लेकिन सीएम की तरफ से टाटा को व्यवस्था दिए जाने की घोषणा के बाद अब यह सारी चीजें औपचारिकता मात्र रह जायेंगी.

बोर्ड की तरफ से कुछ तय नहीं हैः डीके तिवारी (सीएमडी, बिजली बोर्ड)

न्यूज विंग से बिजली बोर्ड के सीएमडी डीके तिवारी ने कहा कि बोर्ड की तरफ से एक कमेटी बनायी गयी है. कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद बोर्ड की बैठक होगी. बोर्ड की बैठक में ही तय होगा कि बिजली व्यवस्था कैसे किसी निजी कंपनी को देनी है. अभी बोर्ड की बैठक नहीं हुई है. कोई नाम तय नहीं हुआ है.

इसे भी पढ़ें – मध्याह्न भोजन में सरकार ने कम की अंडों की संख्या जबकि उम्र के हिसाब से राज्य के 47.8 % बच्चों का वजन कम

Related Articles

Back to top button