
NewDelhi : कोरोना वायरस को छोड़िए, प्रकृति में 540,000 – 850,000 अज्ञात वायरस भी हैं जो लोगों को संक्रमित कर सकते हैं. यह रिपोर्ट विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की है. बता दें कि डब्ल्यूएचओ ने फ्रेंच गुयाना में मायरो वायरस की बीमारी के फैलने के तीन दिन बाद जारी की है. रिपोर्ट के अनुसार डेंगू के समान लक्षणों के साथ, यह वायरस भी मच्छरों के माध्यम से फैलता है.
लंबे समय से विश्व और भारत के लोग गंभीर कोरोना वायरस से जूझ रहे हैं. इस साल कोरोना महामारी के चलते पहले ही आयी ढेरों बुरी खबरों ने दुखी किया हुआ है कि इस बीच प्रमुख विशेषज्ञों की यह रिपोर्ट फिर से डरा रही है. रिपोर्ट की मानें तो भविष्य में दुनिया और अधिक बार महामारी का अनुभव कर सकती है कि इनमें से कुछ कोरोना वायरस की तुलना में घातक होंगे, और नियंत्रित करने के लिए महंगे होंगे.
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वैश्विक रिपोर्ट दुनिया भर के 22 प्रमुख विशेषज्ञों द्वारा लिखी गयी है
जानकारी के अनुसार जैव विविधता और महामारी पर जारी यह वैश्विक रिपोर्ट दुनिया भर के 22 प्रमुख विशेषज्ञों द्वारा लिखी गयी है, जो गुरुवार को जारी की गयी. यह जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं पर अंतरसरकारी विज्ञान-नीति प्लेटफॉर्म द्वारा बुलायी गयी कार्यशाला का परिणाम है जो प्रकृति के क्षरण और बढ़ती महामारी के जोखिमों के बीच संबंधों पर केंद्रित है.
इबोला, ज़िका, निपाह इन्सेफेलाइटिस, और इन्फ्लूएंजा, एचआईवी / एड्स, कोविड -19 जैसी लगभग सभी ज्ञात महामारियों में से अधिकांश (70%) पशु रोगों की उत्पत्ति के रोगाणु हैं.आईपीबीईएस रिपोर्ट में कहा गया है कि वन्यजीवों, पशुओं और लोगों के बीच संपर्क के कारण ये रोगाणु फैल जाते हैं. विशेषज्ञों ने सहमति व्यक्त की कि महामारी के युग से बचना संभव है, लेकिन सही प्रतिक्रिया से रोकथाम तक जरूरी है.
कोविड -19 1918 के ग्रेट इन्फ्लुएंजा के बाद से छठी वैश्विक महामारी है
रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड -19 1918 के ग्रेट इन्फ्लुएंजा महामारी के बाद से कम से कम छठी वैश्विक स्वास्थ्य महामारी है, और हालांकि इन्फ्लुएंजा की उत्पत्ति जानवरों के रोगाणुओं में हुई थी, लेकिन सभी महामारियों की तरह इसकी शुरुआत पूरी तरह से मानव गतिविधियों से प्रेरित थी. बताया गया है कि स्तनधारी जीवों और पक्षियों में वर्तमान में अनुमानित 1.7 मिलियन अज्ञात वायरस मौजूद हैं.
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