
Ranchi: अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्कर संजीव साह चार साल से फरार चल रहा है. संजीव साह का बिहार के अलावा झारखंड, दिल्ली, यूपी, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, असम, पश्चिम बंगाल में हथियार की तस्करी करता था. स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार बिहार के अलग-अलग जिलों के अलावा बांग्ला, पंजाबी, कश्मीरी सहित कई राज्यों के भाषा की जानकारी थी. आरोपी संजीव साह एनआईए का भी वांटेड है. एनआईए ने फरार घोषित किया है. बिहार के मुगेर जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के टीकारामपुर निवासी संजीव साह के खिलाफ (आरसी-31/2018) एनआईए दिल्ली में मामला दर्ज है.
एनआईए जांच में विभिन्न राज्यों में माओवादियों और अन्य अपराधियों को एके-47 हथियार की बरामदगी में संजीव साह के कनेक्शन मिले थे. जांच में यह भी पता चला था कि एके-47 हथियारों की आपूर्ति जबलपुर स्थित सेना के शस्त्रागार से विभिन्न राज्यों में माओवादियों और अन्य अपराधियों को की जाती है. हालांकि एनआइए की टीम आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए लगातार कोशिश में जुटी है. एनआइए ने उसपर दो लाख रुपये का इनाम भी घोषित किया है. देश स्तर पर एके-47 की तस्करी करने वाला संजीव साह की टोह में एनआइए के साथ जिला पुलिस भी लगी है. लगभग ढाई वर्ष पहले जिस एके-47 मामले ने पूरे देश में हंगामा मचाया था, उसकी पटकथा मुंगेर भी लिखी गई थी.
25 दिसंबर 2017 को मिली लीड के बाद पटना एसटीएफ की टीम ने संजीव साह के घर से भारी मात्रा में अलग-अलग देशों के हथियार सहित करीब एक हजार अलग-अलग कारतूस और एके-47 बरामद किया था. मेटल डिटेक्टर से पूरे इलाके की सघन जांच में जमीन के अंदर हथियार होने के संकेत मिले. एसटीएफ की टीम ने जेसीबी मशीन से खुदाई करवाई तो अलग अलग देशों के विदेशी पिस्टल, रिवाल्वर,दोनाली बंदूक, कारतूस, मैगज़ीन और एके-47 की बरामदगी हुई. इस मामले में संजीव साह सहित तीन लोग गिरफ्तार किया गया था.
तस्करी का नेटवर्क विकसित करने के लिए लोगों को कूरियर के रूप में जोड़ता है
देश भर में एके-47 तस्करी करने वाला मास्टर माइंड संजीव साह एनआइए और पुलिस दबिश के बाद खुद को अंडर ग्राउंड कर लिया है. बताया जाता है कि संजीव साह अपना नाम और वेष पूरी तरह से बदल लिया है. संजीव साह का राज्य के अलावा झारखंड, दिल्ली, यूपी, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, असम, पश्चिम बंगाल में सक्रिय हथियार पैनलों के साथ बेहतर संबंध रहा है. इस गलत धंधे उसका नेटवर्क काफी मजबूत है. हथियार निर्माण से जुड़े लोगों ने तस्करी का नेटवर्क विकसित करने के लिए बड़ी संख्या में लोगों को कूरियर के रूप में जोड़ लेता है. पुलिस की कार्रवाई में अक्सर कूरियर और हथियार निर्माण से जुड़े लोग ही पकड़े जाते हैं. पकड़े गए लोगों को जमानत पर जेल से बाहर निकलवाने के बाद उन्हें फिर से काम में जोड़ लिया जाता है.
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