
- रोजगार की उपलब्धता दिखाने के लिए 18 जुलाई से 24 जुलाई के बीच किये गये काम का मास्टर रोल पुनः निकलवा रहे अधिकारी
Ranchi: सूबे में हड़ताली मनरेगा कर्मियों के राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ ने अपनी मांगें पूरी हुए बिना हड़ताल से नहीं लौटने की घोषणा की है. संघ ने विभाग के अधिकारियों पर आरोप लगाया कि विभाग के द्वारा बहला-फुसलाकर हड़ताल से वापस लाने का निरर्थक प्रयास किया जा रहा है लेकिन मनरेगा कर्मी इनके बहकावे में आने वाले नहीं हैं.
संघ ने कहा कि मनरेगा में किसी भी विंग का अलग संगठन नहीं है. प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी, सहायक अभियंता, कनीय अभियंता, लेखा सहायक, कंप्यूटर सहायक एवं ग्राम रोजगार सेवक सभी को मिलाकर एक ही संघ है जो अपनी वाजिब मांगों को लेकर हड़ताल में है.
राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ की ओर से कहा गया कि जब तक हमारी मांगों को पूरा करने के लिए सरकार से सकारात्मक एवं लिखित वार्ता नहीं हो जाती तब तक हड़ताल से लौटने का कोई इरादा नहीं है.
रोजगार की उपलब्धता दिखाने के लिए 18 जुलाई से 24 जुलाई के बीच किये गये काम का मास्टर रोल पुनः निकलवा रहे अधिकारी
संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिरुद्ध पांडेय ने कहा राज्य भर के मनरेगा कर्मी शनिवार को लगातार छठे दिन अनिश्चितकालीन हड़ताल पर डटे हैं. इस बीच विभाग के अधिकारियों द्वारा मनरेगा कर्मियों की हड़ताल विफल करने के लिए तमाम तरह के षड्यंत्र किये जा रहे हैं.
विभाग के अधिकारी द्वारा हताशा में कई ऐसे आदेश दिये जा रहे हैं, जो मनरेगा कानून का खुल्लम खुल्ला उल्लंघन हैं. झारखंड के सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों एवं पंचायत सचिवों पर फर्जी डिमांड एवं मास्टर रोल निर्गत करने के लिए अनुचित दबाव बनाया जा रहा है.
प्रखंड विकास पदाधिकारियों को कहा गया है कि मजदूरों से डिमांड प्राप्त न हो तो भी जिन मजदूरों ने 18 जुलाई से 24 जुलाई के बीच, जिस योजना में काम किया है, उनका उसी योजना में पुनः मास्टर रोल निर्गत कर दिया जाये.
वहीं विभाग के अधिकारी मनरेगा कर्मियों का विकल्प खड़ा करने में ऊर्जा लगा रहे हैं. यह उर्जा मनरेगा कर्मियों के कल्याण में लगाया होता तो आज यह विकट स्थिति सरकार के सामने उत्पन्न नहीं हुई होती.
विभागीय अधिकारी मीडिया के माध्यम से मानवता का पाठ पढ़ा रहे हैं – प्रदेश उपाध्यक्ष महेश सोरेन
संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष महेश सोरेन ने कहा कि विभाग के अधिकारी मीडिया के माध्यम से कहते हैं कि कोरोना काल में हड़ताल पर जाना अमानवीय है. हमें मानवता का पाठ पढ़ाने वालों ने कोरोना ड्यूटी में बिना सुरक्षा, बिना बीमा एवं मुआवजा के प्रावधान के, मनरेगा कर्मचारियों से कोरोना काल में रात दिन काम कराया है और मनरेगा कर्मियों ने राज्य हित में खुशी-खुशी कोरोना वायरस जैसे महामारी के रोकथाम के लिए अपनी सेवा एवं योगदान दिया है.
कार्य के बोझ, दबाव और आर्थिक तंगी के कारण हमारे कई साथी दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल या विकलांग हो गये. सैकड़ों साथी दुर्घटना, आत्महत्या, हाइपरटेंशन तथा ब्रेन हैमरेज के कारण काल के गाल में समा गये. उनका परिवार आज घोर संकट एवं भुखमरी से जूझ रहा है. सरकार ने उन्हें एक फूटी कौड़ी तक नहीं दी और आज जब मनरेगा कर्मियों ने अपने हक और अधिकार की बात की तो ऐसे लोग मानवता का प्रवचन देते हैं. ऐसे अधिकारियों के नीयत और नीति मैं साफ-साफ खोंट दिखाई देता है.
पांच हजार मनरेगा कर्मियों की जगह विभाग ने 50 हजार लोगों को लगा दिया, मजदूरों को नही मिल रहा काम : प्रदेश महासचिव इम्तियाज
प्रदेश महासचिव इम्तियाज ने कहा कि पांच हजार मनरेगा कर्मियों का काम कराने के लिए विभाग ने पचास हजार लोगों को लगा दिया है, लेकिन फिर भी किसी पैरामीटर में अपेक्षित सुधार नही हो पाया है. इसलिए सरकार को यह मान लेना चाहिए कि इतने वर्षों में मनरेगा कर्मियों का भयंकर शोषण हुआ है तथा हमारी वाजिब मांगों को तुरंत मान लेना चाहिए. विभागीय हठधर्मिता के कारण राज्य के मजदूरों एव सरकार को बहुत नुकसान होने जा रहा है.
संघ ने किया मुख्यमंत्री से आग्रह
संघ की ओर से कहा गया है कि उन्होंने माननीय मुख्यमंत्री और माननीय जी से आग्रह किया है कि ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों के बहकावे में आकर मनरेगा कर्मियों की अनदेखी न करें. यह अधिकारी सरकार और कर्मचारियों के बीच दूरी बढ़ाने का काम कर रहे हैं. जितना जल्दी हो सके मनरेगा कर्मियों के साथ सकारात्मक वार्ता कर मांगों को पूरा किया जाये.





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