
Ranchi: आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनाव को लेकर राज्य की ग्राम सभाओं ने राष्ट्रीय, राज्य एवं क्षेत्रीय मुद्दों को राजनीतिक पार्टियों के चुनाव घोषणा पत्र में शामिल कराने के लिए अभियान चलाने का निर्णय लिया है. इस आशय को लेकर रांची में झारखंड लोकतांत्रिक मंच के बैनर तले ग्रामसभा के करीब 100 प्रतिनिधियों ने कार्यशाला का आयोजन किया. इस क्रम में प्रस्तावित ड्राफ्ट व घोषण पत्र पर चर्चा की गयी.
ग्राम संगठनों को सक्रिय होने की जरूरत
कार्यशाला को संबोधित करते हुए कुसुम कमल सिंह ने कहा झारखंड में आनेवाले विधानसभा और लोकसभा चुनाव को देखते हुए अब ग्रामसभा स्तर पर भी ग्राम संगठनों को सक्रिय होने की जरूरत है. नही तो चुनाव के बाद ग्रामसभा पर राज्य और केन्द्र की सरकारें योजनाओं को थोपने का काम करेंगी. जरूरत है राज्य के विकास के लिए ग्रामसभा के स्तर पर जन घोषणा तैयार कर राजनीतिक दलों को वोट लेने के पूर्व अपना एजेंडा क्लियर करने का दबाव डालना. चुनाव में धन बल का प्रयोग कर राजनीतिक दल जन बल को दबाने का काम करती हैं. ऐसे हालात में ग्रामसभा को सामने आना होगा. कार्यशाल में भाग लेते हुए प्रतिभागियों ने कहा आगामी लोकसभा चुनाव भारत के संविधान में निहित लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करने का चुनाव होगा. जब देश में सामाजिक समरसता तार-तार हो रही है.
ब्रह्मणवादी आक्रामकता से देश को बचना होगा
ब्रह्मणवादी आक्रामकता के कारण जीवन के हर क्षेत्र में ऊंच-नीच, भेदभाव चरम पर है. समाज में महिलाओं को उपभोग की वस्तु बनाने की पूरी प्रक्रिया तेज कर दी गयी है. बाजारवाद इसे बढ़ाने का काम कर रहा है. संविधान प्रदत्त आरक्षण पर भी खतरे के संकेत स्पष्ट दिख रहे हैं. इससे वंचित समाजों में हताशा, निराशा के साथ-साथ उनके लिए अवसर संकुचित होता जा रहा है.
देश में फासीवादी व्यवस्था लागू करने का हो रहा प्रयास
लोकतंत्र की प्रक्रिया को उलटकर देश में फासीवादी व्यवस्था लागू करने के प्रयास के तहत मॉब लिंचिग जैसी घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है. इसका शिकार झारखंड सहित पूरे देश में वंचित समाज हो रहा है. आर्थिक कुव्यवस्था को देखें तो देश एवं राज्य में बेरोजगारी चरम पर है. केवल 2018 में एक करोड़ 10 हजार लोगों को नौकरियों से निकाला गया. इससे युवा भारत के युवाओं में आत्महत्या करने की प्रवृति बढ़ती जा रही है.
नोटबंदी ने भारत की अर्थव्यवस्था को विनाश् के कगार पर लाया
देश के राष्ट्रीयकृत बैंक दिवालिया होने की स्थिति में हैं. रिजर्व बैंक की स्वायत्तता और विश्वसनीयता खतरे में है. कुल मिलाकर देश व राज्य आपातकाल और हिटलरशाही की स्थिति में आ चुके हैं. इस मुश्किल से बाहर निकलने का रास्ता जीवंत ग्रामसभाओं से ही निकलेगा.
मौके पर ये लोग थे मौजूद
इस अभियान के राज्य स्तरीय रणनीतिक बैठक में झारखंड लोकतांत्रिक मंच के अफजल अनीश, बलराम, अशोक वर्मा, एनएपीएम के बसन्त हेतमसरिया, अशर्फी नन्द प्रसाद, जेम्स हेरेंज, सुनील मिंज, मिथिलेश कुमार सहित रांची, लोहरदगा, लातेहार, पूर्वी सिंहभूम जिले से आये प्रतिभागी शामिल शामिल हुए.
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