
Ranchi: झारखंड हाइकोर्ट ने हजारीबाग शहर में ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की. सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर से कोर्ट को बताया गया कि कोर्ट के 28 अगस्त के आदेश का अनुपालन नहीं हुआ है, हजारीबाग शहर के सड़कों पर अतिक्रमण, ट्रैफिक पोस्ट की कमी, सीसीटीवी का चालू हालत में नहीं होना आदि समस्याएं अभी बनी हुई है। ट्रैफिक व्यवस्था कोर्टरूस्त नहीं हो पा रही है. वही 7 अक्टूबर के आदेश में कोर्ट ने कहा था कि आदेश का अनुपालन नहीं होने पर अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है.
हजारीबाग में स्वाचालित ट्रैफिक लाइट मॉनिटरिंग सिस्टम के लिए के लिए करीब 39 करोड रुपए का जो बजट बनाया गया है जो कि काफी बहुत अधिक है। हजारीबाग शहर के 25 चौराहों में से सिर्फ एक जगह ट्रैफिक बनकर सिर्फ आईवास किया जा रहा है। ट्रैफिक व्यवस्था में लगे पुलिसकर्मी भी ट्रेंड नहीं है बिना हेलमेट वाले या ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं करते हैं। कोर्ट ने हजारीबाग नगर निगम को स्वाचालित ट्रैफिक लाइट मॉनिटरिंग सिस्टम के बजट की समीक्षा कर इसका उचित बजट निर्धारित कर कोर्ट को अवगत कराया जाए। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। प्रार्थी अच्युत स्वरूप मिश्रा ने कोर्ट से आग्रह किया कि हजारीबाग की सड़कों को पूरी तरह से अतिक्रमणमुक्त किया जाये. सड़कें खाली रहनी चाहिए. जाम की शिकायतें न आए . हजारीबाग में प्रमुख चौक चौराहों पर स्वाचालित ट्रैफिक लाइट मॉनिटरिंग सिस्टम लगे, पर्याप्त संख्या में सभी जगहों पर सीसीटीवी कैमरे सहित अन्य उपकरण लगे। हजारीबाग के 25 चौक चौराहे पर ट्रैफिक लाइट मॉनिटरिंग सिस्टम लगाने में 38 करोड़ 96 लाख रुपये का प्रस्ताव हजारीबाग नगर निगम की ओर से नगर विकास विभाग को भेजा गया था. जिसपर नगर विकास विभाग ने इस प्रोजेक्ट को तीन फेज में करने के संबंध में उनसे बजट मांगा था। जिस पर एक फेज में 14 करोड़ का खर्चा बताया गया था। मामले की अगली सुनवाई 27 नवंबर को होगी।
प्रार्थी अच्यूत स्वरूप मिश्रा ने जनहित याचिका दायर की है. इसमें कहा गया है कि हजारीबाग में ट्रैफिक लाइट की व्यवस्था नहीं है. सड़कों पर छोटे-छोटे दुकान लगते हैं. पार्किंग की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण लगभग सभी चौक-चौराहों पर जाम की स्थिति बनी रहती है.




