न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

 10 साल में बैंकों ने सात लाख करोड़ का कर्ज  राइट ऑफ  किया, 80 फीसदी मोदी सरकार के समय  हुए

पिछले 10 साल में देश के बैंकों ने  सात लाख करोड़ के बैड लोन राइट ऑफ किये हैं. यानी ठंडे बस्ते में डाल दिये हैं. रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों से यह खुलासा हुआ है. 

61

NewDelhi : पिछले 10 साल में देश के बैंकों ने  सात लाख करोड़ के बैड लोन राइट ऑफ किये हैं. यानी ठंडे बस्ते में डाल दिये हैं. रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों से यह खुलासा हुआ है.  बता दें कि बैंकों को डूबने से बचाने के लिए जहां सरकार एक तरफ टैक्सदाताओं के पैसे से उन्हें पूंजी उपलब्ध कराने की दिशा में आगे आयी है, वहीं दूसरी ओर बैंकों ने लोन न लौटाने वालों के कर्ज   बड़े पैमाने पर ठंडे बस्ते में डालने शुरू कर दिये हैं. खबर है कि दिसंबर 2018 तक खत्म हुई तीसरी तिमाही तक बैंकों ने लगभग 1,56,702 करोड़ के बैड लोन राइट ऑफ श्रेणी में डाले गये.

इस तरह पिछले 10 साल में बैंकों ने  सात लाख करोड़ के बैड लोन को राइट ऑफ किया है.  रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों से इस बात का खुलासा हुआ है. बता दें कि राइट ऑफ का मतलब यह कि बैंकों से लिया गया जो लोन चुकाया ना जा सका, उसे बैंकों ने बैलेंस शीट से हटा दिया.

इसे भी पढ़ेंः द्रमुक-कांग्रेस गठजोड़ पर पीएम का निशाना, मोदी को हराने सभी भ्रष्ट एकजुट हो गये हैं

अप्रैल 2014 के बाद से राइट ऑफ लोन की कुल रकम 5,55,603 करोड़ है

आरबीआई के आंकड़ों से खुलासा हुआ है कि पिछले दस साल में राइट ऑफ किये गये अधिकतर लोन का 80 फीसदी हिस्सा आखिरी पांच साल यानी अप्रैल 2014 के बाद किया गया है.  द इंडियन एक्सप्रेस द्वारा दाखिल आवेदन के जवाब में आरबीआई ने खुलासा किया  है कि अप्रैल 2014 के बाद से राइट ऑफ लोन की कुल रकम लगभग  5,55,603 करोड़ रुपये है.

Related Posts

 नजरबंद उमर अब्दुल्ला हॉलिवुड फिल्में देख रहे हैं, महबूबा मुफ्ती किताबें पढ़ समय बिता रही हैं

जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले आर्टिकल 370 के प्रावधानों को खत्म करने के फैसले से पहले कश्मीर के कई राजनेता नजरबंद किये गये थे.

SMILE

जान लें कि  बैड लोन की रकम कम दिखाने के लिए उत्सुक बैंकों ने 2016-17 में 1,08,374 करोड़ और 2017-18 में 161,328 करोड़ के कर्ज को राइट ऑफ किया.  वहीं, 2018-19 के शुरुआती छह महीनों में 82,799 करोड़ रुपये की रकम राइट ऑफ की गयी.  वहीं, अक्टूबर से दिसंबर 2018 की तिमाही में 64,000 करोड़ की रकम राइट ऑफ की  गयी.

बैंक  सूत्रों के अनुसार व्यक्ति विशेष के मामले में कर्ज लेने वाले लोगों और राइट ऑफ किये गये लोन की रकम के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है.  बैंक यह दावा करते हैं कि राइट ऑफ करने के बावजूद रकम की रिकवरी के प्रयास चलते रहते हैं, हालांकि सूत्रों का कहना है कि 15 से 20 फीसदी से ज्यादा रकम की रिकवरी नहीं हो पायी है.  इसके अलावा राइट ऑफ श्रेणी के कर्ज में लगातार इजाफा हो रहा है. यह  रिकवरी और पुनर्पूंजीकरण की रफ्तार से कहीं ज्यादा है.

इसे भी पढ़ेंः राफेल डील के बाद फ्रांस सरकार ने अनिल अंबानी के 1200 करोड़ माफ किये  : फ्रेंच अखबार Le Monde

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like
%d bloggers like this: