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ब्लैक फंगस को लेकर हैं परेशान तो डायल करें 6203709250 हेल्पलाइन नंबर, 24 घंटे में मिलेगी जानकारी

Ranchi : कोरोना की दूसरी लहर के दौरान बढ़ते संक्रमण को देखते हुए वीमेन डॉक्टर्स विंग आईएमए झारखंड और स्वास्थ्य विभाग के द्वारा एक संयुक्त ऑनलाइन जागरूकता अभियान का आयोजन नेशनल हेल्थ मिशन के सहयोग से किया गया.

जिसमें कोविड वैक्सीन के प्रजनन स्वास्थ्य पर सुरक्षित प्रभाव, ब्लैक फंगस से जुड़ी भ्रांतियों, बच्चों के मल्टी-ऑर्गन इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम (MIS-C), सर्वाइकल और ब्रेस्ट कैंसर से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने और जागरूकता फैलाने के लिए 2 लाख से अधिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को जोड़ा गया.

ताकि कोरोना की तीसरी लहर से बच्चों को बचाया जा सके. ब्लैक फंगस को लेकर एक हेल्पलाइन नंबर 6203709250 भी जारी किया गयाा. जहां 24 घंटे ब्लैक फंगस से जुड़े सवालों के जवाब दिए जाएंगे.

वहीं इस अभियान से राज्य के सभी सिविल सर्जन के साथ-साथ सभी धर्म गुरुओं खास कर आदिवासी समाज के धर्म गुरु पाहन समुदाय को जोड़ा गया है.

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कोरोना वैक्सीन का कोई साइड इफेक्ट नहीं

स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने कहा कि राज्य सरकार संभावित तीसरी लहर के लिए तैयार है. प्रत्येक जिला अस्पताल से लेकर प्रखंड स्तर पर बच्चों के लिए चाइल्ड फ्रेंडली कोविड वार्ड बनाये जा रहे हैं.

जिलों में ऑक्सीजन बैंक का निर्माण करने और बच्चों के इलाज के लिए आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है. रिम्स को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाया गया है.

उन्होंने कहा कि ब्लैक फंगस को लेकर भी सरकार विशेष तैयारी कर रही है. प्रत्येक जिला के सदर अस्पताल में ब्लैक फंगस के लिए स्पेशल वार्ड बनाया जा रहा है. सरकार इसको राज्य आपदा के रूप में लाने के प्रस्ताव पर समीक्षा कर रही है. टीकाकरण को लेकर कहा कि इसके कोई साइड इफेक्ट नही है.

बच्चे को पेट दर्द, उल्टी और बुखार तो हो जाएं अलर्ट

पहले सत्र में इलेनोईस यूनिवर्सिटी, अमेरिका से फेफड़ा रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि कश्यप ने महिलाओं व पुरुषों के प्रजनन स्वास्थ्य पर, गर्भवती और दूध पिलाती माताओं पर वैक्सीन के सुरक्षित प्रभाव पर सभी को जागरूक किया.

उन्होंने कहा कि MIS-C के मामलों नवजात शिशुओं से 18 साल के पोस्ट कोविड के बच्चों में संक्रमण के 3 से 4 हफ़्तों के बाद देखा जाता है. सबसे चिंता की बात यह है कि इस रोग के लक्षण डेंगू, मलेरिया आदि बीमारियों जैसे ही हैं.

ऐसे में अगर बच्चों को दो-तीन दिन पेट दर्द, बुखार, उल्टी, दस्त, आंख, मुंह लाल, शरीर पर चकत्ते हों तो सावधान हो जाएं. उन्हें तुरंत डॉक्टर के पास लेकर जाए. समय पर ट्रेटमेंट से बच्चे की जान बचाई जा सकती है. बीपी लो और सास का फूलना एडवांस स्टेज के लक्षण होते हैं.

टेक्सास यूनिवर्सिटी, अमेरिका से डॉ. पूजा कश्यप ने बच्चों की ज़िन्दगी बचाने के लिए झारखंड सरकार को पीडियाट्रिक आईसीयू में तैयारी को लेकर प्रदान किया.

उन्होंने कहा की आईसीयू में हार्ट एवं पेट की अल्ट्रासाउंड मशीन, हेड सीटी स्कैन, वेंटिलेटर की जरूरत है. उन्होंने सुझाव दिया एडल्ट आईसीयू एक्सपर्ट डॉक्टर को प्रशिक्षित कर मेन पावर की कमी को पूरा किया जा सकता है.

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कोरोना को मात देने वाले साफ सफाई का रखें ध्यान

एम्स नई दिल्ली से प्रशिक्षित डॉ बिभूति कश्यप ने ब्लैक फंगस से जुड़ी भ्रांतियों को दूर किया. उन्होंने बताया कि ब्लैक फंगस में एक चीज साफ है कि ये शुगर और अनियंत्रित स्टेरॉयड लेने वाले मरीजों में पाया जा रहा है.

वैसे ही एक सत्य यह भी है कि कुछ 10 प्रतिशत मरीज ऐसे भी हैं जिनको शुगर की बीमारी नहीं हुई है। इन मरीजों में इस बीमारी के होने की संभवतः वजहें अत्यधिक भाप लेना, वैक्सीन नहीं लेना, जिंक का सेवन करना और डबल म्यूटेन्ट स्ट्रेन से कोरोना वायरस का इन्फेक्शन होना हो सकता है.

हालाकिं इसकी पुष्टि के लिए और रिसर्च जारी है. सुरक्षा की दृष्टि से यह ज़रूरी है कि कोरोना से उबरे मरीज साफ़ सफाई का ख़ास ध्यान रखें.

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गैस सिलेंडर खाली हुआ तो बंद हो गया काम

डॉ स्वरुपा मित्रा, चीफ कैंसर रोग विशेषज्ञ, राजीव गांधी कैंसर इंस्टिट्यूट एंड रिसर्च सेंटर, नई दिल्ली ने स्वास्थ्य साहियाओं को सर्वाइकल कैंसर और स्तन कैंसर के शुरुआती लक्षणों को पहचानने का प्रशिक्षण दिया.

वीमेन डॉक्टर्स विंग आईएमए झारखण्ड की अध्यक्ष डॉ भारती कश्यप ने स्वास्थ्य मंत्री को जानकारी दी कि झारखण्ड के 23 सदर अस्पतालों में से 11 सदर अस्पतालों में सर्वाइकल प्री-कैंसर के इलाज की मशीन की व्यवस्था स्थानीय विधायक के साथ मिलकर हम लोगों ने की थी.

रांची, खूंटी, गिरिडीह, कोडरमा, हजारीबाग, साहेबगंज में डिजिटल विडियो कोल्पोस्कोप के साथ क्रायो मशीन लगाई गई है. वहीं संथाल परगना के बाकी सदर अस्पतालों में क्रायो मशीन और गैस सिलिंडर की व्यवस्था की गई थी. लेकिन गैस सिलिंडर एक बार खाली होने की वजह से सभी जगह काम रुक गया.

उन्होंने कहा कि जिस रफ़्तार से सर्वाइकल कैंसर ऊन्मूलन अभियान चल रहा था उस रफ़्तार से 1 से 2 वर्षों में में झारखण्ड से सर्वाइकल कैंसर का खात्मा हो जाता.

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