
NewDelhi : पाकिस्तान के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के खूंखार आतंकी तैयार होते थे. आतंक की इस फैक्टरी में तैयार मानव बम (फिदायीन दस्ते) न केवल भारत, बल्कि अफगानिस्तान, ईरान और बलूचिस्तान में भेजे जाते थे. इसी आतंक की फैक्टरी जैश-ए-मोहम्मद के ठिकाने को भारतीय वायुसेना ने बमबारी कर उड़ा दिया है. सूत्रों के अनुसार बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों को आईएसआई व पाकिस्तानी आर्मी द्वारा ट्रेनिंग दी जाती थी. पिछले पांच साल में लगभग 225 आतंकी बालाकोट से कश्मीर में भेजे गये थे। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार इस शिविर में प्रशिक्षित 36-41 फिदायीन आतंकी जल्द ही भारतीय सीमा में प्रवेश करने की तैयारी कर रहे थे. सेना, आईबी, रॉ, एनआईए और जम्मू-कश्मीर के सुरक्षा बलों की संयुक्त रिपोर्ट पर विमर्श करने के बाद ही पाकिस्तान के बालाकोट में एयर स्ट्राइक की योजना बनी थी. सुरक्षा एजेंसियों के पास जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी कैंप के दर्जनों फोटो और वीडियो मौजूद थे. उसके बाद केंद्र सरकार ने संबंधित एजेंसियों और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) के साथ बैठक कर रणनीति के अनुसार एयर स्ट्राइक को अंजाम दिया.
बता दें कि सेना और बीएसएफ के जवानों पर निशाना साधने वाले जैश के सहयोगी बैट (बॉर्डर एक्शन टीम) के सदस्य भी बालाकोट में ही तैयार होते थे.पहाड़ी पर लगभग आठ एकड़ में बने इस कैंप में करीब छह सौ लोगों के एक साथ रहने का इंतजाम था. कैंप के अंदर जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी तैनात रहते थे, जबकि बाहर स्थानीय पुलिस और आर्मी लगी रहती थी. ले. जन शंकर प्रसाद (सेवानिवृत) के अनुसार भारतीय एजेंसियों के पास यह पुख्ता जानकारी थी कि इस कैंप में आतंकियों की ट्रेनिंग हमेशा चलती रहती है.
वायु सेना ने बालाकोट पर बड़ा सोच समझकर टारगेट किया है
सर्दियों में यहां के प्रशिक्षित आतंकियों को सीमा पार कराया जाता था. अगर भारत एयर स्ट्राइक नहीं करता तो बालाकोट के आतंकी मानव बम बन कर भारतीय सीमा में प्रवेश कर जाते. जानकारों के अनुसार वायु सेना ने बालाकोट पर बड़ा सोच समझकर टारगेट किया है. जैश-ए-मोहम्मद के अलावा आईएसआई को यह लग रहा था कि भारतीय वायु सेना सीमा से सटे इलाकों में बने शिविरों पर ही हमला करेगी. उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि वायु सेना के विमान सीमा के इतने अंदर घुस कर आतंकी शिविर को निशाना बना सकते हैं. दूसरी ओर रॉ और आईबी को यह जानकारी मिल चुकी थी कि सीमा से लगते ट्रेनिंग कैंपों से आतंकियों को पहाड़ी पर बने कैंप में शिफ़्ट कर दिया गया था. भारतीय वायु सेना ने इसी कैंप पर बम बरसा दिये. जैश के इस कैंप में तैयार आतंकी ईरान और पाक के क्रॉस बॉर्डर पर भी अपनी हरकत करते हैं. बलूचिस्तान में कथित तौर पर राजनीतिक हत्या, वहां के नागरिकों में दहशत फैलाना और बम विस्फोट जैसी घटनाओं को अंजाम देने के लिए भी बालाकोट से ही आतंकी बुलाए जाते थे.
रणनीतिकार कमर आगा के अनुसार आतंकियों के कैंपों को खत्म करने के लिए पाकिस्तान को कई बार चेताया गया था. हर बार पाकिस्तान यह कह कर अपना पल्ला झाड़ लेता कि उसके यहां पर कोई ट्रेनिंग कैंप नहीं चल रहा है. सैन्य विशेषज्ञ राज कादियान का भी यही कहना है कि पाकिस्तान, आतंकवाद पर हमेशा डायलॉग करने की बात कहता है. परवेज मुशर्रफ ने कहा था कि पांच-छह साल में आतंकियों के ट्रेनिंग कैंप खत्म कर देंगे. वे कैंप अभी तक चल रहे हैं.
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