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कैसे मजबूत होगी नेत्रदान की मुहिम, 20 वर्षों में केवल रिम्स में Eye Donation की सुविधा उपलब्ध करा सकी है सरकार

Ranchi: नेत्रदान को महादान माना गया है. समाज में इसे लेकर लगातार चेतना बढ़ी है. राज्य में निजी संस्थाएं भी इस मुहिम को लगातार प्रोत्साहित करने में लगी हैं. पर दुर्भाग्य से सरकारी मेडिकल संस्थानों में इसे लेकर मुकम्मल व्यवस्था नहीं है. 20 वर्षों में भी केवल रिम्स, रांची में ही नेत्रदान की व्यवस्था शुरू की जा सकी है.

यह सूचना स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, झारखंड की है. विधानसभा में नेत्रदान पर पूछे गये सवाल के जवाब के तौर पर विभाग ने कहा है कि क्षेत्रीय नेत्र संस्थान, रिम्स रांची में नेत्र दान की सुविधा उपलब्ध है. शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज, धनबाद में इसकी प्रक्रिया चल रही है.

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भरना पड़ता है आवेदन

विधायक राज सिन्हा सभी सरकारी मेडिकल संस्थानों में नेत्रदान की सुविधा व्यवस्था, कॉर्निया को सुरक्षित रखने के लिये 2014-15 के बाद से जरूरी सॉल्यूशन की खरीद नहीं किये जाने संबंधी विषय पर स्वास्थ्य विभाग से जानकारी मांगी थी. सदन में सूचना दी गयी कि आरईओ रिम्स, रांची में नेत्रदान के लिये इच्छुक लोग संपर्क करते हैं. इसके लिये उनसे शपथ पत्र भरवाया जाता है. रिम्स के अलावे धनबाद के सरकारी मेडिकल कॉलेज में इसके लिये पहल की जा रही है. कॉर्निया को सुरक्षित रखने को आवश्यक सॉल्यूशन की खरीद नियमित तौर पर रिम्स प्रबंधन करता है. शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज, धनबाद में भी सॉल्यूशन और अन्य सामग्री की खरीद समय पर की जाती है.

प्राइवेट अस्पतालों के भरोसे नेत्रदान का मिशन

कई ऐसे नागरिक हैं जो मरणोपरांत अपनी आंखों को डोनेट करने को इच्छुक रहते हैं. अलग-अलग जिलों में कई ऐसे केस दिखते हैं. पर सरकारी मेडिकल संस्थानों की लाचारगी इसमें दिखती है. रिम्स को छोड़ दिया जाये तो प्राइवेट हॉस्पिटलों कश्यप मेमोरियल आई बैंक, पुरुलिया रोड और बरियातू मोड़ स्थित बिहार आई बैंक ट्रस्ट (तीनों रांची) में कॉर्निया संग्रह और नेत्र प्रत्यारोपण की व्यवस्था है. इसके अलावा जमशेदपुर आई हॉस्पिटल, साकची में ये सुविधा है. बोकारो के आई बैंक एंड कॉर्नियल ट्रांसप्लांटेशन सेंटर, बोकारो जेनरल हॉस्पिटल में भी कॉर्निया संग्रह होता है. यानि कॉर्निया संग्रह का काम राज्य के महज चार जिलों रांची, जमशेदपुर, धनबाद और बोकारो में ही होता है. राज्य में वर्ष 2012 से अब तक  की अवधि में कुल 200 से अधिक कॉर्निया संग्रह किया जा सका है.

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आई डोनेशन के लाखों दावेदार पर रियल्टी खराब

रोटरी क्लब, झारखंड के डिस्ट्रिक्ट चेयरपर्सन प्रवीण राजगढ़िया के मुताबिक राज्य में हर साल आई डोनेशन के लिये लाखों लोग शपथ पत्र भरते हैं. पर जब समय आता है तो वास्तविकता कुछ और होती है. शपथ पत्र भरने वाले के परिजनों को दुख की घड़ी में आइ डोनेशन का मसला ध्यान नहीं रहता. ऊपर से सरकारी व्यवस्था ऐसी नहीं कि कोई सहजता से यह सब करवा सके. सरकार को नेत्रदान अभियान के मामले में संवेदनशीलता दिखाने की आवश्यकता है. सरकारी अस्पतालों में नेत्रदान व्यवस्था को अनिवार्य और पारदर्शी बनाने के लिए प्रोत्साहित करने की जरूरत है. फिलहाल इस मामले में गिनी चुनी संस्थाएं और निजी अस्पताल ही कुछ हद तक जागरूकता संबंधी और दूसरे प्रयास कर पा रहे हैं. अब भी नेत्रदान के लिये आदर्श व्यवस्था राज्य में नहीं हो पाना चिंताजनक है.

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