
- -6468 कुल रजिस्टर्ड डॉक्टर हैं, इनमें से कई प्राइवेट डॉक्टर हैं
- -प्रति स्वास्थ्य केंद्र एक डॉक्टर का भी नहीं है अनुपात
- -बिहार से सात गुणा कम है झारखंड में डॉक्टरों की संख्या, बिहार में 44642 डॉक्टर
Kumar Gaurav
Ranchi : झारखंड में गरीब मरीजों के इलाज के लिए विभिन्न स्तर पर स्वास्थ्य केंद्र है. सदर अस्पताल, सब डिस्ट्रीक्ट अस्पताल, कॉम्युनिटी हेल्थ सेंटर और हेल्थ सब सेंटर हैं. इन सबको मिलाकर 4098 स्वास्थ्य केंद्र हैं.
इन स्वास्थ्य केंद्रों में इलाज का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राज्य में मात्र 6468 प्राइवेट डॉक्टर रजिस्टर्ड हैं. इन्हीं डॉक्टरों के जिम्मे प्राइवेट और सरकारी सभी अस्पतालों में इलाज करने की जिम्मेवारी है.
अगर राज्य के तीनों पुराने मेडिकल कॉलेजों को जोड़ दिया जाए तो अस्पतालों की संख्या 4101 हो जायेगी. अधिकतर सरकारी डॉक्टरों की सेवा मेडिकल कॉलेज और सदर अस्पतालों में ली जाती है. शेष डॉक्टर सब डिस्ट्रीक्ट अस्पताल में कार्यरत होते हैं.
राज्य के अधिकतर अनुमंडल अस्पतालों में भी डॉक्टरों की भारी कमी है. इन 6468 रजिस्टर्ड डॉक्टरों में भी 2 हजार के करीब डॉक्टर्स प्राइवेट अस्पतालों में अपनी सेवा देते हैं. ऐसे में देखा जाता है कि अधिकतर सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों के इलाज के लिए डॉक्टर आते ही नहीं हैं.
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प्राइवेट अस्पतालों में लूटे जा रहे हैं गरीब मरीज, आयुष्मान का नहीं मिलता लाभ
सरकारी डॉक्टरों की कमी होने की वजह से गरीब मरीजों को भी प्राइवेट अस्पतालों का रुख करना पड़ता है. छोटे से छोटे इलाज के लिए भी प्राइवेट अस्पतालों में सीजीएचएस रेट से कई गुणा अधिक पैसे वसूले जाते हैं.
आलम यह होता है कि गरीबों को कर्ज में पैसे लेकर इलाज कराना पड़ता है. इसके अलावा प्राइवेट अस्पतालों में आयुष्मान के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति ही की जाती है. राजधानी के अधिकतर बड़े अस्पतालों ने सिर्फ एक या दो बीमारियों के इलाज के लिए ही खुद को इंपैनल्ड कराया हुआ है. ऐसे में मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में आयुष्मान योजना का लाभ शायद ही मिल पाता है.
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राज्य में स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति
सदर अस्पताल – 24
सब डिस्ट्रीक अस्पताल – 12
कॉम्युनिटी हेल्थ सेंटर – 188
हेल्थ सब सेंटर – 3876
कुल रजिस्टर्ड डॉक्टरों की संख्या – 6468
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