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माननीय! सुनिए मजदूरों की पीड़ाः खाने के लिए दाने -दाने को मोहताज हो रहे प्रवासी मजदूर 

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Pravin Kumar

Ranchi: सदी के सबसे बड़ी त्रासदी से गुजर रहे प्रवासी मजदूरों की अखिर कौन सुनेगा? जिन मजदूरों को अब तक किसी तरह की राहत सरकार उपलब्ध नहीं करा सकी है उनका सब्र अब साथ छोड़ने लगा है.

ऐसे प्रवासी मजदूर हर हाल में अपना गांव, अपने परिवार के बीच लौटना चाहते हैं.

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तमिलनाडु में फंसे झारखंड के प्रवासी मजदूरों की संख्या राज्य सरकार के आकडे़ के अनुसार 83 हजार से अधिक है. ऐसे मजदूर जिनके पास खाने के लिए कुछ बचा नहीं, लॉकडाउन में सबसे ज्यादा परेशान हैं.

वैसे मजदूरों में धनबाद जिले के भी मजदूर हैं. इनका घर धनबाद के महाराजगंज में है और इनकी संख्या 30 से अधिक है.

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क्या कहते हैं प्रवासी कामगार


तमिलनाडु में फंसे मोहम्मद शब्बीर कहते हैं- रमजान और रोजे के दिन में भी हमलोग नमक-भात खा के रह रहे हैं. केंद्र और राज्य सरकार हम लोगों को जल्द से जल्द घर वापस ले जाये नहीं तो हमलोग पैदल चलने को विवश हो जायेंगे.

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अब तक घर लौटने के लिए किसी भी तरह की सूचना स्थानीय प्रशासन ने नहीं दी है जबकि कई बार स्थानीय पुलिस स्टेशन से भी संपर्क किया.

तमिलनाडु में फंसे राजेश कहते हैं- क्या करें जब केंद्र सरकार भी हम मजदूरों के लिए ट्रेन उपलब्ध नहीं करा रही है. सरकारों को कह देना चाहिए कि आपलोग अपनी व्यवस्था खुद कर लें. लॉकडाउन को मानते हुए हम लोग बहुत मुश्किल में जी रहे हैं. लेकिन भूखे पेट अब रुकना संभव नहीं.

संजय कुमार कहते हैं- क्या करें, जो पैसे थे वह खत्म हो गये. सहायता नहीं मिली. भूखे मरने से तो अच्छा है अपने घर के लिए निकल चलें.

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मजदूरों की सूची और पत्र भेजे

पत्र और मजदूरों की सूची.

संजय कुमार ने राज्य सरकार के नाम पत्र और मजदूरों की सूची भी न्यूजविंग को भेजी जिसे हम प्रकाशित कर रहे हैं.

धनबाद के 23 से अधिक मजदूर तमिलनाडु राज्य के नीलगिरि जिले के चांडेल थाना क्षेत्र में फंसे हैं. संजय कहते हैं- झारखंड के 500 से अधिक मजदूर इस आस-पास हैं. इनका फोन नम्बर 6382967830 है.

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