
Ranchi: झारखंड के जेल में सिस्टम में सुधार को लेकर कोर्ट के स्वत: संज्ञान की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट में हुई. मामले में राज्य सरकार की ओर से शपथ पत्र दाखिल किया गया. महाधिवक्ता राजीव रंजन ने कोर्ट को बताया की मॉडल जेल मैनुअल का ड्राफ्ट तैयार है लेकिन नया मॉडल प्रिजन एक्ट भारत सरकार ने लाया है. इसलिए पुराने प्रिजन एक्ट में बदलाव लाया जाएगा. प्रिजन एक्ट के तहत ही जेल मैनुअल बनता है.
पुराने प्रिजन एक्ट में बदलाव कर रहे हैं, इसलिए मॉडल जेल मैनुअल के लिए थोड़ा रुक जाना होगा. नया प्रिजन एक्ट एक माह में फाइनलाइज कर दिया जाएगा उसके बाद मॉडल जेल मैनुअल नोटिफाइड कर दिया जाएगा. कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा समय देने के आग्रह को स्वीकार करते हुए मामले की सुनवाई 24 जुलाई निर्धारित की है. हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संजय कुमार मिश्र की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सोमवार को मामले की सुनवाई की.
पूर्व की सुनवाई में एमिकस क्यूरी मनोज टंडन की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2016 में मॉडल जेल मैनुअल बनाया है. इसे सारे राज्य सरकार को भेजा गया था और उन्हें इसी के आधार पर मॉडल जेल मैनुअल बनाने को कहा गया था. दूसरे राज्यों में मॉडल जेल मैनुअल बन चुका है लेकिन झारखंड में अब तक नहीं बना है. जब-जब भी हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई होती है तो सरकार की ओर से कहा जाता है कि मॉडल जेल मैन्युअल बनने का काम प्रोसेस में है. इस पर खंडपीठ ने राज्य सरकार से पूछा कि वर्ष 2019 में भी शपथ पत्र दाखिल कर राज्य सरकार की ओर से कहा गया था कि मॉडल जेल मैनुअल बनने का काम प्रोसेस में है, आज भी सरकार यही बात कह रही है. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने एक केस में जेल रिफॉर्म को लेकर दिशा निर्देश दिया था. इसी के आधार पर हाईकोर्ट ने मामले में स्वत संज्ञान लिया है.




