
Ranchi: राज्य के 13 अधिसूचित जिलों में वर्ग तीन और चार के पदों पर संबंधित जिलों के निवासियों के शत प्रतिशत आरक्षण से संबंधित मामले पर झारखंड हाइकोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई.
हाईकोर्ट की वृहद पीठ में शिक्षक नियुक्ति मामले की सुनवाई भी हुई. हाईस्कूल शिक्षक नियुक्ति मामले में याचिकाकर्ता सोनी कुमारी के वकील ने कोर्ट में अपना पक्ष रखा.
जब सरकार को अपना पक्ष रखने की बारी आयी तो एजी ने कुछ देर अपना पक्ष रखा, फिर स्वास्थ्य का हवाला देते हुए मंगलवार का समय मांगा जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया.
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ये है पूरा मामला
गौरतलब है कि राज्य सरकार की ओर से 13 जिलों को आरक्षित करने और 11 को अनारक्षित करने के आदेश को झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी गयी है.
कोर्ट ने हाईस्कूल शिक्षक नियुक्ति में 18 हजार शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी रोक लगा रखी है. झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की ओर से की जा रही नियुक्ति प्रक्रिया पर अंतिम निर्णय अब हाईकोर्ट में होगा.
रघुवर सरकार ने लिया था जिला आरक्षण का फैसला
गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास की सरकार ने अधिसूचित जिलों में सभी रिक्तियों को उसी जिले के लिए आरक्षित करने का फैसला किया था.
उस दौरान ये भी निर्णय लिया था कि सभी पद अगले 10 साल के लिए संबंधित जिले के निवासियों के लिए आरक्षित होंगे.
सोनी कुमारी और अन्य ने शत प्रतिशत आरक्षण देने के खिलाफ झारखंड हाइकोर्ट में याचिका दायर की है. इसमें कहा गया है कि किसी भी जिले में वहां के लोगों को शत प्रतिशत आरक्षण नहीं दिया जा सकता है, यह संविधान की भावना के प्रतिकूल है.
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याचिकाकर्ता ने दी है दलील
याचिकाकर्ता ने यह दलील दी थी कि जहां तक पांचवीं अनुसूची के क्षेत्र की बात है, वहां किसी तरह का नीतिगत निर्णय राज्यपाल के स्तर पर नहीं, बल्कि राष्ट्रपति के स्तर पर ही लिया जा सकता है.
पूर्व में इस मामले में एक्टिंग चीफ जस्टिस एचसी मिश्रा और जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में सुनवाई हो चुकी है. अदालत ने सुनवाई के क्रम में हाईस्कूल शिक्षक नियुक्ति पर रोक भी लगायी थी.
हालांकि बाद में हाइकोर्ट की डबल बेंच ने यह भी आदेश दिया था कि शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया जारी रहेगी, लेकिन हाइकोर्ट के अंतिम निर्णय से नियुक्ति प्रक्रिया प्रभावित होगी.
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