
New Delhi: राजनीतिक पार्टियों के मुफ्त वादों यानि फ्रीबीस पर रोक लगाने की मांग संबंधित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ में सुनवाई हुई. इसमें कोर्ट ने सुनवाई के दौरान संकेत दिया कि इस केस को बड़ी बेंच में भेजी जा सकती है. इस मामले की अगली सुनवाई बुधवार यानी 24 अगस्त को होगी.मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस एनवी रमना की बेंच में हुई, जिसमें जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस हिमा कोहली शामिल थीं।
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सीजेआई की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय के वकील विकास सिंह ने कहा कि मुफ्त वादों के चलते देश दिवालिया होने की स्थिति में है. इस पर CJI रमना ने कहा कि- मान लीजिए मैं वादा कर दूं कि चुनाव जीतने पर लोगों को सिंगापुर भेज दूंगा,तो चुनाव आयोग इस पर कैसे रोक सकता है. न्याय मित्र के रूप में कपिल सिब्बल तो आम आदमी पार्टी के वकील के तौर पर सुनवाई में पेश हुए।
कोर्ट के सामने आए अलग अलग पक्ष
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान CJI रमना ने कहा कि यह मुद्दा समाज और अर्थव्यवस्था की भलाई के लिए उठाया है। कोर्ट ने सभी पक्षों से कहा कि सभी पार्टियां, भले वो भाजपा हो या कोई और… मुफ्त घोषणओं के पक्ष में हैं। अब इस पर बुधवार को सुनवाई होगी वहीं कपिल सिब्बल ने अपनी ओर से पक्ष रखते हुए कहा कि कभी महात्मा गांधी ने एक बार कहा था कि समझदार व्यक्ति हमेशा अपने स्टैंड में सुधार करता है। ऐसा नहीं है कि मैं खुद को समझदार कह रहा हूं. वहीं अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि कोई कमेटी यह कैसे तय कर सकती है कि फ्री क्या है और क्या नहीं? कोर्ट को इस याचिका को सुनना ही नहीं चाहिए, हमें अनुच्छेद 19(2) के तहत चुनाव से पहले बोलने की आजादी है. वहीं विकास सिंह ने कहा कि सभी को सत्ता चाहिए इसलिए सभी मुफ्त घोषणाओं का ऐलान करते हैं। ये किसी दिन ऐसे मुकाम पर पहुंचेगी कि देश दिवालिया हो जाएगा। इस मामले में सुब्रमण्यम बालाजी का फैसला गलत है और इसे खारिज किया जाना चाहिए.




