
- 25 सूत्री मांगों के लिए फिर से आंदोलन की तैयारी कर रहे दो लाख पचास हजार कर्मचारी
Ranchi: अराजपत्रित कर्मचारियों के लिए वर्तमान सरकार कोई निर्णय नहीं ले पायी है. यह कहना है झारखंड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष मनोज कुमार सिन्हा का.
उन्होंने जानकारी दी कि पिछले पांच साल तक राज्य के अराजपत्रित कर्मचारी आंदोलन करते रहे. वर्तमान राज्य सरकार ने चुनाव के पहले आश्वस्त किया था कि सरकार बनने पर कर्मचारियों की मांगें पूरी की जायेंगी. चुनाव के पहले कहा भी था कि अधिकारों के लिए राज्य के कर्मचारियों को किसी तरह के आंदोलन की जरूरत नहीं होगी.
सिन्हा ने बताया कि 25 जून को 25 सूत्री मांगों के समर्थन में मांग दिवस आयोजित किया जायेगा. इस दिन सभी जिलों में अराजपत्रित कर्मचारी मुख्यमंत्री के नाम उपायुक्तों को मांग पत्र सौंपेंगे. सिन्हा ने बताया कि अराजपत्रित कर्मचारियों ने कोविड-19 जैसे समय में भी योगदान दिया. लेकिन राज्य सरकार ने कर्मचारियों के हित में अब तक कोई निर्णय नहीं लिया. सिन्हा ने कहा कि सरकार ने अपने वायदों के अनुरूप एक भी काम नहीं किया.
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छह महीने में एक भी निर्णय नहीं
महामंत्री अशोक कुमार सिंह ने कहा कि सरकार को सत्ता में आये छह महीने हो गये है. इन छह महीनों में सरकार ने राज्य कर्मचारियों की एक भी मांग पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया. जबकि सरकार सत्ता में आयी ही इसी वायदे के साथ.
इन्होंने बताया कि राज्य में लगभग दो लाख पचास हजार वेतनभोगी और मानदेय कर्मी है जिनमें अब वर्तमान सरकार के प्रति आक्रोश है. कोरोना लॉकडाउन को ध्यान में रखते हुए कर्मचारियों की ओर से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए विरोध किया जायेगा.
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ये है मांगें
- समाहरणालय में पदस्थापना और बैठने का स्थान.
- शाखा का सृजन.
- मुफ्फसिल कार्यालय की कार्यावधि पांच दिनों की हो.
- राजस्व उप निरीक्षक, आंगनबाड़ी कर्मियों के साथ हुए समझौते को लागू किया जाये.
- कोविड-19 कार्य में लगे सभी कर्मियों को 50 लाख का बीमा आदि.
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