
Ranchi : राज्य में पहली बार बनी पूर्ण बहुमत वाली सरकार का कार्यकाल इसी साल समाप्त हो जायेगा. करीब पांच साल पहले जब सरकार बनी थी तो युवाओं में काफी उम्मीदें थीं. वे रोजगार की संभावनाएं देख रहे थे. प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं की नजर राज्य सरकार की नौकरियों में खाली पड़े पदों पर थी.
इन्हीं सब मसलों पर न्यूज विंग युवा संवाद की चौथी कड़ी में चतरा के युवा सुनील कुमार सुमन और प्रकाश कुमार ने अपने विचार रखे. पेश है महत्वपूर्ण अंश :
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राज्य में सरकारी नौकरियों के कुल सृजित पद 11 लाख 84 हजार 012 हैं जिसके मुकाबले 5,19,447 पदों पर लोग कार्यरत हैं जबकि 6 लाख 64 हजार 565 पद रिक्त हैं. पूर्ण बहुमत वाली सरकार ने नियुक्ति के लिए कोई ठोस पहल नहीं की. सरकार युवाओं के लिए नौकरी के अवसर सृजित नहीं कर सकी.
राज्य के छात्रों, युवाओं की समस्याओं को लेकर राजनीतिक दल मौन हो जाते हैं. न ही सत्ता पक्ष और न ही विपक्ष छात्र हित में काम कर रहे. राज्य में दरोगा नियुक्ति का विज्ञापन 2009 के बाद निकाला गया जिसमें हजारों छात्र आवेदन करने से इसलिए वंचित हो गये कि राज्य सरकार ने मनमाने तरीके से उम्र सीमा तय कर दी थी.
पूर्ण बहुमत वाली सरकार में सरकारी नौकारियों के 56% पद रिक्त हैं. राज्य के लाखों युवा रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं. बड़े पैमाने पर पलायन की स्थिति भी है. कृषि व पशुपालन में 9600 भू-राजस्व निबंधन विभाग में 4835 उच्च और तकनीकी शिक्षा विभाग में 1247 वन एवं पर्यावरण विभाग में 4616 पद रिक्त हैं. प्रथामिक शिक्षक के पद भी राज्य में 50 हजार से अधिक रिक्त हैं. ऐसे में राज्य में गुणवतापूर्ण शिक्षा की बात करना ही बेमानी है.
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राज्य को चरगाह बना दिया है राजनेताओं ने, बदहाल है शिक्षा व्यवस्था
राज्य में युवाओं की दयनीय स्थिति और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर के अभाव के कारण राज्य से युवाओं का बड़े पैमाने पर मजदूरी के लिए पलायन हो रहा है. युवाओं के सवाल को लेकर किसी भी राजनीतिक दल ने कभी सजीदंगी से काम नहीं किया.
विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उरांव ने प्लस 2 में राज्य के बहार के लोगों की नियुक्ति किये जाने के मामले को खुद देखने का भरोसा दिलाया था, लेकिन कुछ किया नहीं.
बहुमत वाली सरकार सिर्फ सड़क, पुल-पुलिया निर्माण निर्माण कर विकास का ढोल पीट रही है, जबकि मूल समस्याएं जस की तस हैं.
राज्य के सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है. झारखंड के सरकारी विद्यालय सिर्फ खिचड़ी खाने के केंद्र के रूप में विकसित हुए हैं जहां गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात करना बेमानी है.
राज्य में नौकरी देने के नाम पर युवाओं की कॉन्ट्रैक्ट बहाली की जा रही है. इसमें भी गोरखधंध किया जा रहा है. कांटेक्ट की नौकरी देकर युवाओं का भविष्य भी अधर में लटकया जा रहा है. राज्य का नीति निर्धारण करने वाले लोग, राज्य का भविष्य गर्त में धकेलने का काम कर रहे हैं.
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