
Manoj Kumar Pintu
Giridih: गिरिडीह में आयुष्मान भारत योजना का फायदा लाभार्थी कितना उठा पा रहे है, यह फिलहाल सवालों के घेरे में है. लेकिन इतना जरूर है कि केन्द्र सरकार की यह योजना कुछ प्राईवेट हॉस्पिटलों के लिए बड़ी कमाई का जरिया जरूर बन चुका है.
हालांकि कुछ प्राईवेट हॉस्पिटलों के अत्याधुनिक होने के कारण लाभार्थियों को इस योजना से फायदा मिल रहा है. लेकिन जिले के अधिकांश हॉस्पिटल्स की हालात ऐसी नहीं है कि उन्हें आयुष्मान भारत योजना से जोड़ा जा सकें. इसके बाद भी बगैर अर्हता पूरा करने वाले प्राईवेट हॉस्पिटल्स को योजना के तहत भुगतान करने वाली बीमा कंपनी नेशनल इंश्योरेस ने जोड़ दिया है.
इससे साफ जाहिर है कि इसके पीछे कंपनी और योजना की मॉनिटरिंग करने वाले अधिकारियों का मकसद क्या हो सकता है. क्योंकि किसी भी गंभीर बीमारी के मरीज योजना के तहत रजिस्ट्रर्ड प्राईवेट हॉस्पिटल में भर्ती होते हैं तो कुछ दिन इलारत रहने के बाद वैसे मरीजों को अंततः रेफर कर दिया जाता है. यही हालात है गिरिडीह में आयुष्मान भारत योजना का.
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एक साल में किया गया 11 करोड़ से अधिक का भुगतान
निजी अस्पतालों में सुविधा की कमी के बावजूद, पिछले एक साल में आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज करने वाले हॉस्पिटल्स ने बीमा कंपनी नेशनल इंश्योरेंस से 11 करोड़ 37 लाख छह हजार का भुगतान भी ले लिया. भुगतान का यह आंकड़ा पिछले साल सितबंर माह से लेकर चालू वित्तीय वर्ष 2019-20 के सितबंर का है. स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों की मानें, तो चालू वित्तीय वर्ष में कोरोना महामारी का खतरा बढ़ने के बाद जिले के कुछ प्राईवेट अस्पतालों ने बीमा कंपनी के पास काफी अधिक राशि क्लेम की है. क्लेम के आधार पर ही अब तक 11 करोड़ 36 लाख का भुगतान भी कर दिया गया.
हालांकि योजना की मॉनिटरिंग कर रहे एक पदाधिकारी का दावा है कि पिछले एक साल में जितना भुगतान किया गया. उसमें तीन से चार करोड़ का खर्च बाहर में इलाज कराएं लोगों पर किया गया है. जो इसी जिले के रहने वाले हैं.
निजी अस्पतालों के लिए कमायी का जरिया बनी योजना
लिहाजा, समझा जा सकता है कि कैसे आयुष्मान भारत योजना जिले के कुछ वैसे प्राईवेट हॉस्पिटलों की कमाई का बड़ा जरिया बन गया है. जिनके पास कोई संसाधन नहीं है. सिविल सर्जन डा. अवद्येश सिन्हा भी मानते है कि वक्त-वक्त पर योजना और भुगतान की समीक्षा होनी जरुरी है. क्योंकि इसी समीक्षा के आधार पर कुछ दिनों पहले बिरनी प्रखंड के वेंदाता हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में गड़बड़ी पाई गई. जिसके आधार पर वेंदाता पर जुर्माना लगाया गया. फिलहाल वेंदाता पर और कार्रवाई होनी है. इसकी जांच और समीक्षा की जा रही है.
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कौन-कौन अस्पताल हैं रजिस्टर्ड
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों की मानें, तो एक साल के भीतर शहर के कुछ नामचीन नर्सिंग होम को आयुष्मान भारत से अत्यधिक भुगतान कर दिया गया. जानकारी के अनुसार आयुष्मान भारत योजना से जिले के 34 सरकारी गैर सरकारी हॉस्पिटल रजिस्ट्रर्ड है. जिसमें सदर हॉस्पिटल, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बेंगाबाद, बगोदर, गांडेय, बिरनी, जमुआ, पीरटांड, गांवा, तिसरी के अलावे रेफरल हॉस्पिटल डुमरी, धनवार के बाद प्राईवेट हॉस्पिटलों में शहर के चिरैयाघाट स्थित विश्वनाथ नर्सिंग होम, मकतपुर-बरगंडा रोड स्थित शिवम क्लिनिक, कचहरी रोड स्थित नवजीवन नर्सिंग होम, बोड़ो स्थित सहयोग हॉस्पिटल, नवद्धीप नर्सिंग होम, जीवनधारा नर्सिंग होम, पचंबा स्थित कौशल क्लिनिक, भंडारीडीह स्थित आजाद नर्सिंग होम, बंसती देवी गोयनका सेवा सदन, जीडी बगेड़िया सेवा सदन, डुमरी स्थित मीणा जेनरल हॉस्पिटल, नेत्रधाम आई हॉस्पिटल, सरिया सेवा सदन, दुबे नर्सिंग होम, क्रिएस्ट केयर हॉस्पिटल, वेंदाता हॉस्पिटल समेत कई शामिल हैं.
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