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गिरिडीह : कोरोना ने इकोनॉमी को दिया तगड़ा झटका, टीएमटी फैक्ट्री की नगरी में टैक्स वसूली का ग्राफ गिरा

Giridih :  कोरोना ने गिरिडीह की इकोनॉमी को तीन महीने में तगड़ा झटका दिया है. वाणिज्यकर विभाग से राज्य सरकार को मिलने वाले राजस्व में कमी आई है. राज्य सरकार को गिरिडीह अचंल से हर माह 20-22 करोड़ का राजस्व मिलता था. हालांकि बीते वित्तीय साल 2019-20 के जनवरी से लेकर लॉकडाउन के पहले मार्च महीनें में ही राजस्व वसूली का आंकड़ा का ग्राफ कुछ बेहतर रहा. जिसमें गिरिडीह अचंल ने 11 करोड़ 49 लाख की वसूली की.  लेकिन इसके बाद अप्रैल, मई और जून में वसूली बेहद कम हुई. हर माह गिरिडीह अचंल तमाम प्रयासों के बाद महज डेढ़ से दो करोड़ का राजस्व ही दे पा रहा है.

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एक दशक से कम हो रही है  टैक्स वसूली

सेल टैक्स के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि एक दशक के भीतर राजस्व का ग्राफ इतना नीचे गिरा है. जबकि गिरिडीह को लौह उद्योग की नगरी के रूप में जाना जाता है. एक दर्जन से अधिक टीएमटी फैक्ट्री तो दर्जन भर से अधिक स्पंज आयरन के कई बड़े प्लांट यहां संचालित हैं. इन प्लांटो के अलावे छोटे कारोबार में कपड़ा, जूता और किराना के थोक कारोबार से अचंल को पहले 20 से 22 करोड़ का राजस्व मिलता था. राजस्व के गिरते आंकड़े ने वाणिज्य-कर विभाग के पदाधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है.

दरअसल, फरवरी के सेल टैक्स वसूली के बाद 25 मार्च से कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर लॉकडाउन कर दिया गया था. सारी गतिविधी ठप हो गई. इसके बाद केन्द्र सरकार ने मई के मध्य से गतिविधियां चालू करने का फरमान सुनाया.

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इस प्रकार है आंकड़ा

इधर वाणिज्य-कर विभाग से मिले आंकड़ो के अनुसार चालू वित्तीय वर्ष 2020-21 में गिरिडीह अचंल को अप्रैल माह में एक करोड़ 22 लाख तो मई माह में दो करोड़ 35 लाख का राजस्व मिला. वहीं जून माह में एक करोड़ 69 लाख की वसूली वाणिज्य-कर विभाग कर चुका है.

इधर वाणिज्य-कर विभाग को चिंता इस बात की सबसे अधिक है कि अब भी आर्थिक गतिविधि पूरी तरह से पटरी पर नहीं आई है. छड़ और स्पंज फैक्ट्री तो सारे खुल चुके है. लेकिन स्टील प्लांट के मालिकों से रह-रह कर मिल रही जानकारी ही वाणिज्य-कर विभाग की चिंता बढ़ा रही है. क्योंकि हर कारखाने में उत्पादन तो हो रहे हैं, लेकिन खरीदार गायब हैं.

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