
Palamu / Garhwa: कोरोना (कोविड-19) के कारण लाॅकडाउन लागू है. इसकी वजह से समाज का हर तबका परेशान है. कई लोगों को काम नहीं मिल रहा तो कई लोग भूख से बेहाल हैं.
वहीं इन सबके बीच भीख मांगकर किसी तरह अपना और अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाले खानाबदोश मुसहर परिवारों की स्थिति ज्यादा खराब हो गयी है. पलामू प्रमंडल के गढ़वा जिले में लाॅकडाउन के कारण 40 मुसहर परिवार दाने दाने को मोहताज हो गये हैं.
गढ़वा जिला मुख्याालय से 10 किलोमीटर दूर लोटो गांव में 10 झोपड़पट्टी में 40 सदस्यीय मुसहर जाति के लोग रहते हैं. उनलोगों की झोपड़पट्टी में 5 दिनों से चूल्हा नहीं जला है. ये सभी लोग भूखे मरने को विवश हैं. मुसहरों का कहना है कि हमलोगों के ऊपर सरकार और अधिकारियों का कोई ध्यान नहीं रह गया है. हमलोग मर रहे हैं कि जिंदा हैं, ना तो कोई देखने वाला है और न ही कोई सुनने वाला.
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नहीं मिलता भीख, लोग भगा देते हैं दरवाजे से
मुसहरों ने कहा कि इन दिनों स्थिति ज्यादा खराब हो गयी है. जिस दरवाजे पर जाते हैं, लोग भगा देते हैं. पहले ऐसा नहीं होता था. कुछ न कुछ जरूर मिल जाता था. लेकिन न जाने अब भीख देने वाले को क्या हो गया है? लोग कहते हैं कि लाॅकडाउन है. हम तुमलोगों को भीख नहीं देंगे. कहीं से भी एक पैसे की आमदनी नही हैं लॉकडाउन में.
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सरकार भी लोगों की तरह कर रही है बर्ताव
मुसहर लोगों का कहना है कि जिस तरह ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के लोग बर्ताव कर रहे हैं, उसी तरह सरकार भी हमलोगों से सलूक कर रही है. एक बार हमलोगों को 5 किलोराशन मिला था. लेकिन उसके बाद फिर हमलोगों को राशन नहीं मिला है. 5 किलो चावल 2 महीना कैसे चल जाएगा. सुबह-शाम खाना बनाना होता है. अब अनाज नहीं है और हमलोग 5 दिनों से खाना नहीं बनाये हैं.
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एक टाइम के बाद दूसरे समय के लिए हो जाते हैं मोहताज
सभी का कहना है कि कहीं से मांग कर लाते हैं तो अपने बच्चे लोगों को खिलाते हैं. वो भी एक टाइम खिलाएंगे तो दूसरा टाइम का कोई पता नहीं रहता है कि खाना मिलेगा भी कि नहीं.
भीख मिलता है तो खाते हैं नहीं तो भूखे ही सो जाते हैं. हमलोगों को खाने पीने में बहुत दिक्कत हो रही है. कहीं भीख भी नहीं मिल रहा है. हम जिला प्रशासन से मांग करते हैं कि हमलोगों के राशन मुहैया कराया जाए. ताकि हमें भूखे न मरना पड़े.




