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10 सालों में बाढ़ से 16 हजार मौतें और 47000 करोड़ की बर्बादी की आशंका :एनडीएमए

NewDelhi : देश में बारिश और बाढ़ के खतरे लगातार बढ़ते जा रहे हैं. दक्षिण भारत का बड़ा हिस्सा खास कर केरल इस मानसून में प्राकृतिक आपदा की मार झेल रहा है.  केरल और कर्नाटक में 94 साल की सबसे भयानक बाढ़ की तबाही से 350 से ज़्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. जबकि आठ लाख से ज़्यादा लोग राहत शिविरों में पहुंचाये गये हैं. इधर राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण(एनडीएमए) ने भविष्य के लिए भयावह अनुमान लगाया है.

एनडीएमए के अनुसार आने वाले 10 सालों में बारिश और बाढ़ से भारी विनाश की आशंका है. एनडीएमए का आकलन है कि अगले 10 सालों में देशभर में बाढ़ और बारिश की वजह से 16,000 लोग मारे जायेंगे और 47,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति बर्बाद हो जायेगी.

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भारत के पास  एडवांस्ड सैटलाइट और पूर्व चेतावनी प्रणाली है

हालांकि भारत के पास काफी एडवांस्ड सैटलाइट और पूर्व चेतावनी प्रणाली है, जिसकी मदद से मौसम का पूर्वानुमान लगाते हुए मौतों की संख्या में कमी लायी जा सकती है. लेकिन इसकी सारी कवायद कागज तक ही सीमित रहने का आरोप लगता रहा है. कहा जाता है कि जब भी कोई आपदा सामने होती है, तो एनडीएमए  गाइडलाइन जारी करने, सेमिनार का आयोजन और बैठकें बुलाने तक सीमित नजर आता है. खबरों के अनुसार गृह मंत्रालय ने हाल में देश के 640 जिलों में आपदा के खतरों को लेकर एक आकलन किया है.

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नैशनल रिजिल्यन्स इंडेक्स (एनआरआई) तैयार किया गया है

इसके अनुसार डीआरआर के तहत राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रदर्शन के आधार पर एक नैशनल रिजिल्यन्स इंडेक्स (एनआरआई) तैयार किया गया है.  इस अध्ययन में जोखिम का आकलन, रोकथाम और आपदा के दौरान राहत कार्य जैसे मापदंड शामिल किये गये हैं. अध्ययन के अनुसार यह अभी शुरुआती दौर में हैं. माना जाता है कि आपदा से जूझने में हमारी कार्यक्षमता का स्तर बहुत नीचे है. इसमें बहुत अधिक सुधार की जरूरत है.

ज्यादातर राज्यों ने अब तक खतरों का राज्यवार आकलन, आपदा के बदलते स्वरूप और उससे बचाव को लेकर कोई काम नहीं किया है. राज्यों के आकलन में जिलों या गांव के स्तर पर गहरे अध्ययन की कमी है. ‘नडीएमए की रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल प्रदेश को छोड़कर किसी भी राज्य ने विस्तृत रूप से आपदा के खतरों का आकलन नहीं किया है.

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