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पूर्व नक्सली बहादुर ऑटो चलाकर कर रहा परिवार का भरण पोषण, दर्ज थे 25 मुकदमे

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Bermo. बेरमो अनुमंडल के नावाडीह प्रखंड अंतर्गत ऊपरघाट स्थित पेंक नारायणपुर थाना के कंजकिरो का 55 वर्षीय पूर्व नक्सली बहादुर तुरी वर्तमान में अपनी आजीविका चलाने तथा परिवार का भरण पोषण करने के लिए ऑटो चलाकर गुजर बसर कर रहा है. ढ़ाई दशक पूर्व नावाडीह के ऊपरघाट में खौफ का पर्याय बहादुर तुरी को ऑटो लेकर सवारी का घंटों इंतजार करते प्रतिदिन बोकारो थर्मल के ऑटो स्टैंड में देखा जा सकता है. बोकारो थर्मल से कंजकिरो, पेंक के लिए ऑटो से सवारी ढ़ोने का काम करता है.

जंगल में कर रहा था गुजर बसर

पूर्व नक्सली 1995 में केकेसी से जुड़ा था बहादुर-कंजकिरो के तुरी टोला का बहादुर तुरी वर्ष 1995 में भाकपा माओवादी के नीतियों एवं सिद्धांतों से प्रभावित होकर उसके फ्रंटलाईन की संस्था क्रांतिकारी किसान कमेटी से जुड़ा था. संगठन से जुड़ने के बाद लगातार कमेटी की बैठकों में शामिल होकर संगठन के प्रचार प्रसार के कार्यों में लग गया था.

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पुलिस एवं प्रशासन के धरपकड़ अभियान के डर से घर से बाहर जंगलों में ही गुजर बसर करने लगा था. पुलिस के डर से परिवार के सदस्यों से रात के अंधेरे में छिपकर मिलता था और चंद घंटे बाद ही वापस लौट जाना पड़ता था. बहादुर के परिवार में पत्नी, दो बेटी एवं दो बेटा है. सभी की शादी हो चुकी है. शादी के बाद एक बेटी का देहांत हो चुका है.

25 मुकदमे दर्ज थे बहादुर पर

नक्सली बहादुर तुरी पर नावाडीह एवं बोकारो थर्मल थाना में लगभग 25 मुकदमे नक्सली कांडों तथा कोयला के अवैध कारोबार को लेकर दर्ज थे. दो राइफल सहित चार हथियार करवाये थे बरामद-वर्ष 2003 में बोकारो की तत्कालीन एसपी तदाशा मिश्रा के कार्यकाल में नावाडीह के तत्कालीन थानेदार सुजय विद्यार्थी एवं बोकारो थर्मल थानेदार अवध कुमार यादव ने कंजकिरो से बहादुर तुरी को गिरफ्तार किया था.

पुलिस हिरासत में पूछताछ के दौरान ही बहादुर की निशानदेही पर कंजकिरो से दो राइफल एवं दो पिस्टल पुलिस ने बरामद किये थे. एसपी तदाशा मिश्रा ने बहादुर को संगठन छोड़कर मुख्य धारा में लौटने के लिए प्रयास भी की थी.

 

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मुख्यधारा में लौटकर ऑटो फाइनेंस करवाया

भाग दौड़, परिवार से दूर जंगलों में रहने की विवशता, दर्जनों मुकदमे के कारण बहादुर ने मुख्यधारा में लौटने का निर्णय करते हुए वर्ष 2016 में खुद का एक ऑटो बजाज कंपनी से फाइनेंस करवा लिया. बहादुर कहता है कि ऑटो फाइनेंस के बाद प्रतिमाह 6 हजार का किस्त चुकाने के साथ परिवार के भरण पोषण की जवाबदेही भी थी.

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कहा कि प्रतिमाह ऑटो चलाकर 10 हजार रुपया कमा लेता हूं जिससे 6 हजार रुपया किस्ती देकर चार हजार में अपना एवं परिवार का किसी प्रकार गुजर बसर हो जाता है. कहा कि सरकार से उसे अब तक किसी प्रकार की सहायता नहीं मिली है.

बावजूद वह खुश है कि अब उसे पुलिस अनावश्यक ना तो तंग करती है और ना ही केस मुकदमे में ही फंसाती है. पुराने सारे केस समाप्त हो चुके हैं. बहादुर वर्तमान में अपने परिवार के साथ कंजकिरो में खुशहाल की जिंदगी व्यतीत कर रहा है.

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