
NewDelhi : सीबीआई के पूर्व चीफ आलोक वर्मा सेवानिवृत हो गये हैं, लेकिन खबर है कि उन्हें रिटायरमेंट के बाद अभी तक जीपीएफ समेत अन्य बेसिक रिटायरमेंट बेनिफिट पूरा नहीं मिला है . जानकारी के अनुसार आलोक वर्मा पिछले कई माह से एक जगह से दूसरी जगह चक्कर काट रहे हैं. चर्चा है कि वर्मा को मोदी सरकार के खिलाफ अदालत जाने का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है .
जान लें कि आलोक वर्मा 1979 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे हैं. आलोक वर्मा ने सरकार की तरफ से सीबीआई चीफ पद से खुद को हटाये जाने के फैसले को अदालत में चुनौती दी थी. कहा जा रहा है कि इससे नाराज सरकार ने उनकी पिछली सर्विस के लाभ से वंचित कर रखा है.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार केंद्रीय गृहमंत्रालय के पत्र के अनुसार सरकार ने आलोक वर्मा के अनधिकृत रूप से छुट्टी पर जाने को सरकारी सेवा के नियमों के तहत गंभीर उल्लंघन माना है . इस वजह से आलोक वर्मा का जीपीएफ समेत अन्य लाभ पर रोक लगा दी गयी है .
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वर्मा के अनधिकृत अवकाश को सेवा में विराम माना गया है
सूत्रों के अनुसार वर्मा के मामले की गृह मंत्रालय द्वारा जांच करने के बाद आलोक वर्मा की 11 जनवरी 2019 से लेकर 31 जनवरी 2019 की गैरहाजिरी अवधि को बिना जवाबदेही के रूप में मानने का फैसला लिया गया. वर्मा के अनधिकृत अवकाश को सेवा में विराम माना गया है जिससे वह अपने सेवानिवृत्ति लाभ से वंचित हो गये है. जीपीएफ रोकने के संबंध में मंत्रालय ने वर्मा के खिलाफ दो अलग-अलग अनुशासनात्मक कार्यवाही के मामले का जिक्र किया है जिसमें उनको कटघरे में खड़ा किया गया है.
जान लें कि आलोक वर्मा और सीबीआई में उनके अधीनस्थों के साथ चर्चित विवाद के कारण एक दूसरे के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवायी गयी थी, जिसे गृह मंत्रालय ने गंभीरता से लिया. आरोप है कि वर्मा ने अपने अधीनस्थ सीबीआई के तत्कालीन विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ गलत एफआईआर दर्ज करवाने में कथित तौर पर अपने पद का दुरुपयोग किया. उधर राकेश अस्थाना ने वर्मा पर भ्रष्टाचार के कुछ अहम मामलों की लीपापोती करने का आरोप लगाया था.
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कर्मचारी जांच के घेरे में हो तो भी उसके जीपीएफ पर रोक नहीं लगाई जा सकती
वर्मा के नजदीकी कुछ अधिकारियों का कहना है कि यदि कोई कर्मचारी किसी विवादास्पद मामले या जांच के घेरे में हो तो भी उसके जीपीएफ पर रोक नहीं लगाई जा सकती. जीपीएफ एक ऐसी निधि है जिसमें सरकारी कर्मचारी अपने वेतन का एक निश्चित प्रतिशत योगदान देता है और संग्रहित राशि का भुगतान कर्मचारी को उसकी सेवानिवृत्ति पर किया जाता है.
सूत्रों के अनुसार इस आधार पर आलोक वर्मा ने पिछले 27 जुलाई को सरकार को एक पत्र लिखकर जीपीएफ का अंतिम भुगतान जारी करने की मांग की है. खबर है कि गृह मंत्रालय ने इस संबंध में कानूनी मामलों के विभाग से राय मांगी है कि क्या वर्मा को जीपीएफ का भुगतान किया जा सकता है. कानून विभाग का सुझाव है कि गृह मंत्रालय को इस मामले में श्रम मंत्रालय और व्यय विभाग (वित्त मंत्रालय) से संपर्क करना चाहिए. गृह मंत्रालय ने अब श्रम मंत्रालय से इस संबंध में राय मांगी है. साथ ही, वित्त मंत्रालय से वर्मा को जीपीएफ का भुगतान किये जाने के संबंध में सुझाव मांगा गया है.
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