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हाल-ए-संतालः दो किमी पथरीली पगडंडी पर पैर हो जाते लहूलुहान, तब नसीब होता है दो घूंट पानी

समस्या दूर नही हुई तो वोट का बहिष्कार करेंगे ग्रामीण, 17 फरवरी की बैठक में लेंगे निर्णय

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  • सबका साथ सबका विकास का दावा फेल, डोभा भी नजर नहीं आता

Pravin Kumar

Ranchi/Dumka: चापानल में चुल्लू भर पानी नहीं. चुंआ से किसी तरह पानी छान कर गला तर हो रहा है. पूरी दिनचर्या के लिए दो किलोमीटर संकीर्ण पगडंडी से पानी लाने में ग्रामीण हांफ रहे हैं. इससे पूरी दिनचर्या अस्त व्यस्त हो रही है. यह हकीकत है दुमका के गोपीकांदर प्रखंड का. सरकार अब भी नहीं चेती तो इस गर्मी में झारखंड में भीषण जलसंकट की स्थिति उत्पन्न हो जायेगी. हजारों करोड़ रुपये की पेयाजलापूर्ति योजनाएं सिर्फ कागजों में ही सिमट कर रह गयी है. आज हम बात कर रहे हैं संताल के गोपीकांदर की. प्रखंड में जितने भी चापानल हैं वे खराब पड़े हैं. कई बार सीएम ने संताल का दौरा किया. संताल के विकास पर फोकस करने की बात कही. लेकिन स्थिति जस की तस है. ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर समस्याओं का समाधान जल्द नहीं हुआ तो वोट का बहिष्कार किया जायेगा. ग्रामीणों की बैठक 17 फरवरी को होगी, जिसमें आगे की रणनीति तैयार की जायेगी.

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खरौनी बाजार पंचायत के लोग परंपरागत जल स्त्रोत पर हैं निर्भर

धरातल पर सरकारी योजनाओं की हकीकत कुछ और ही है. अफसर, विधायक और मंत्री भी इस पर मौन साधे हुए हैं. गोपीकांदर प्रखंड मुख्यालय से महज 15 किलोमीटर दूर खरौनी बाजार पंचायत के आदिवासियों की स्थिति और विकट हो गयी है. पंचायत में 875 से अधिक की आबादी है. लेकिन पूरी आबादी चुंआ के पानी पर ही निर्भर है. वह भी दो दिलोमीटर की दूरी पर है.

नमोडीह गांव में भी पानी का संकट

गोपीकांदर प्रखंड के नमोडीह गांव में भी पानी संकट है. इस गांव में पांच टोले हैं. गांव में 175 घर हैं. कुल पांच चापानल हैं. सभी खराब हो गये हैं. ग्रामीणों से कई बार जनप्रतिनिधियों से इसकी शिकायत भी की. लेकिन आज तक चापानलों की मरम्मत नहीं हो पायी है. पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण ग्रामीणों को गर्मी में भीषण जल संकट का सामना करना पड़ता है.

जानिये पांच टोलों में चापानल की स्थिति

कमार टोला : इस टोला में मात्र एक चापाकल है, जो लगभग चार वर्षो से खराब है. वहां के ग्रामीण दो किलोमीटर दूर दुंदवा गांव से पीने का पानी लाते हैं.

आमेर जोला टोला : वहां मात्र एक चापाकल है, जो ठीक है. लेकिन पीने के पानी के लिए वह चापानल पर्याप्त नहीं है. साफ पानी नहीं आता है.

जोजो टोला : यहां भी मात्र एक चापाकल है, जो करीब दो वर्ष से खराब है. ग्रामीण लगभग एक किलोमीटर दूर पहाड़ी नाला व झरना से ग्रामीण पानी लाते हैं.

खासनमोडीह टोला : एक भी चापाकल नही है. ग्रामीण बड़ा पाथर गांव से पीने का पानी लाते हैं.

मांझी टोला : इस टोला में कुल दो चापाकल हैं. जिसमे एक चापाकल लगभग एक वर्ष से और दूसरा करीब तीन महीने से खराब है. ग्रामीण लगभग ढेड़ किलोमीटर दूर पथरीले रास्ते से झरना व डोभा से पानी लाते हैं.

दूर से पानी लाने में पैर में पड़ जाते हैं छाले

गोपीकांदर प्रखंड के टोलों के ग्रामीणों का कहना है कि पानी के लिए पथरीले रास्तों से गुजरना पड़ता है. पैर में छाले पड़ जाते हैं. रात में पानी लाने से डर लगता है. इंसानों के साथ मवेशियों को भी पानी के लिए परेशानी होती है.  झरना/डोभा में मवेशी भी पानी पीते है और मवेशियों के मल-मूत्र से झरना/डोभा का पानी दूषित हो जाता है. लेकिन प्यास बुझाने के लिए इसी झरना-डोभा का पानी ही पीते हैं. यहां की जसिंता मरांडी बताती हैं कि दूषित पानी पीने से बीमारी की संभावना बढ़ जाती है. शौचालय जाने के लिए भी ग्रामीणों को सोचना पड़ता है.

ग्रामीणों की क्या हैं मांगें

  • हर टोला में दो डीप बोरिंग हो
  • गांव में जल मीनार (पानी टंकी) का निर्माण
  • गांव में सड़क निर्माण
  • जर्जर मांझी थान का पुन: पक्कीकरण
  • नमोडीह गांव से खरौनी बाजार तक जर्जर हुए सड़क की मरम्मत
  • समस्याओं का समाधान नहीं तो वोट बहिष्कार

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