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पांच एमवीआइ और आठ माप तौल निरीक्षक के भरोसे चल रहा राज्य

वाहनों के फिटनेस और माप तौल प्रमाण पत्र जारी होने में हो रही दिक्कतें

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Ranchi: झारखंड के परिवहन विभाग और खाद्य सार्वजनिक वितरण और उपभोक्ता मामलों के विभाग में निरीक्षकों की भारी कमी से काम प्रभावित हो रहा है. परिवहन विभाग में सिर्फ पांच मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर (एमवीआइ) हैं. डिनके जिम्मे सभी पांच प्रमंडलों का काम चल रहा है. वहीं आठ माप तौल निरीक्षकों के जरिये 24 जिलों में बाट, बटखरा, मीटर और इलेक्ट्रोनिक वेईंग मशीन का लाइसेंस निर्गत करने से लेकर उसके नवीकरण तक का काम कराया जा रहा है.

ये दोनों महकमों में एमवीआइ और माप तौल निरीक्षकों की कमी से व्यावसायिक वाहनों के मालिकों और व्यापार से जुड़े लोगों को काफी परेशानी हो रही है. इस संबंध में फेडरेशन ऑफ झारखंड चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज की तरफ से संबंधित विभागों को आवश्यक कदम उठाने का आग्रह भी किया गया है.

पांच एमवीआइ संभाल रहे हैं 24 जिलों का काम

परिवहन विभाग के पांच एमवीआइ 24 जिलों का काम संभाल रहे हैं. कहने के लिए रांची में मो शहनवाज, जमशेदपुर में अवधेश कुमार सिंह, दुमका में बुद्धिनाथ चौधरी, धनबाद में अजय कुमार और पलामू में मुकेश कुमार एमवीआइ हैं. इन्हें सभी संबंधित प्रमंडल का कार्यभार दिया गया है. अवधेश कुमार सिंह इस माह के 31 दिसंबर को सेवानिवृत हो जायेंगे, जबकि बुद्धिनाथ चौधरी और अजय कुमार अगले वर्ष रिटायर हो रहे हैं. इनका काम व्यावसायिक वाहनों को चलने योग्य हैं, इसका प्रमाण पत्र देना है. इतना ही नहीं, रांची में स्थापित स्वचालित फिटनेस सेंटर से जारी होनेवाले प्रमाण पत्र में काउंटर साइन करना होता है.

एमवीआइ                          जिला और प्रभार

मो. शहनवाज                    रांची, खूंटी, सिमडेगा, गुमला, लोहरदगा
अवधेश कुमार सिंह            जमशेदपुर, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसांवा, बोकारो
बुद्धिनाथ चौधरी                 दुमका, देवघर, जामताड़ा, पाकुड़, साहेबगंज
अजय कुमार                     धनबाद, गिरिडीह, हजारीबाग, कोडरमा, रामगढ़, चतरा
मुकेश कुमार                     पलामू, लातेहार, गढ़वा

दो वर्ष की जगह पांच वर्ष तक मिले लाइसेंस

चेंबर के माप तौल उप समिति के अध्यक्ष प्रमोद सारस्वत ने बताया कि खाद्य सार्वजनिक वितरण और उपभोक्ता मामलों को वेट्स एंड मेजरमेंट निदेशालय का प्रभार दिये जाने से दिक्कतें बढ़ी हैं. इस विभाग की अहमियत इसलिए है, क्योंकि इनके प्रमाण के बगैर किसी भी वस्तु, जिसे तराजू अथवा इलेक्ट्रोनिक मशीन से तौलकर बेचा जाता है. उस वस्तु की बिक्री नहीं हो सकती है. 2015 के पहले कृषि विभाग के अधीन यह निदेशालय था.

निदेशालय में दो वर्ष के लिए तराजू से जुड़े मेजरमेंट की वस्तुओं का लाइसेंस मिलता है. इसमें बाट, बटखरा और कपड़ा नापनेवाला मीटर शामिल है. वहीं इलेक्ट्रोनिक मशीनों का लाइसेंस एक वर्ष के लिए मिलता है. माप तौल निरीक्षकों की कमी की वजह से नवीकरण का काम व्यापक तरीके से प्रभावित हो रहा है. इतना ही नहीं विभाग में ऑनलाइन नवीकरण की व्यवस्था की गयी है. लेकिन कंप्यूटर ऑपरेटरों के नहीं रहने से रांची छोड़ दूसरे जिलों में यह काम पूरी तरह बाधित हो रहा है.

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