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सिम्फ़र में मानदेय के नाम पर हुई करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितता

सीएसआइआर डीजी के पत्र से मचा हड़कंप

Dhanbad: धनबाद में केंद्रीय खनन एवं ईंधन अनुसंधान संस्थान यानी सिंफर में करोडों रुपये की वित्तीय गड़बडी का मामला सामने आया है. यहां के वेतनभोगी अधिकारियों ने स्वयं प्रोजेक्ट कंस्लटेंसी और टेस्टिंग के नाम पर मानदेय के रूप में करोड़ो रूपये का भुगतान ले लिया.

इस पूरे मामले पर संज्ञान लेते हुए सीएसआइआर के डीजी ने पत्र लिखकर रुपये वापस करने की बात कही है. पत्र मिलने से सिम्फ़र के निदेशक और वैज्ञानिकों में हड़कंप गया है.

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2.16 करोड़ रूपये भुगतान तो सिर्फ पिछले वित्तीय वर्ष में सिम्फ़र के निदेशक के नाम पर हुआ. मानदेय के नाम पर बरती अनियमितता का अब यह मामला सामने आने के बाद वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद यानी सीएसआइआर के प्रौद्योगिकी प्रबंधन निदेशालय, सामाजिक आर्थिक मंत्रालय इंटरफेस ने अब मानदेय की राशि वापस मांगी है.

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सारा भुगतान सिंफर निदेशक डॉ. प्रदीप कुमार सिंह के नाम पर हुआ है. यह मामला सीएसआइआर प्रयोगशालाओं की ओर से उनके उनके द्वारा शुरू की गई परियोजनाओं, तकनीकी सेवाओं, परामर्श आदि के लिए अर्जित धन के वितरण से संबंधित है.

सीएसआइआर के अनुसार विभिन्न अनुसंधान परियोजनाओं, कंस्लटेंसी और टेस्टिंग कार्य के लिए मानदेय के रूप में सिंफर निदेशक डॉ. प्रदीप कुमार सिंह ने वर्ष 2016 से लेकर 2021 तक में कुल 17.89 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. हाल के दिनों में यानी जनवरी के बाद से 2.16 करोड़ का इनके तरफ से भुगतान किया गया.

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इस बीच संबंधित विभागीय मंत्रालय को धनबाद के रमेश कुमार राही ने शिकायत की थी कि जब वैज्ञानिक अपने कार्यों के लिए सरकार से वेतन एवं अन्य सुविधाएं प्राप्त कर रहे हैं तो उन्हें किसी कार्य के लिए मानदेय कैसे भुगतान किया जा सकता है. यह पूरी तरह से वित्तीय गड़बड़ी का मामला है.

मंत्रालय से आदेश मिलते ही सीएसआइआर डीजी ने राशि भुगतान पर पहले रोक लगा दी. उसके बाद इस पूरे प्रकरण की जांच करने के उपरांत राशि वापस करने का आदेश दिया है.

बताते चलें कि सिंफर संबंधित एजेंसियों से प्रोजेक्ट टेस्टिंग और कंस्लटेंसी के एवज में निर्धारित राशि लेती है. इसी कार्य के लिए प्रोजेक्ट में लगे वैज्ञानिकों एवं अन्य कर्मचारियों को मानदेय का भुगतान किया जाता है.

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