
Ranchi. राज्य में फाइलेरिया उन्मूलन अभियान चलाया जायेगा. 22 फरवरी से इसके लिए राज्य के 4 जिलों में विशेष मुहिम शुरू की जायेगी. चार ऐसे जिलों को स्पेशली सेलेक्ट किया गया है. इनमें साहेबगंज, बोकारो, रामगढ़ और धनबाद शामिल हैं. स्वास्थ्य औऱ परिवार कल्याण विभाग ने इन जिलों में फाइलेरिया मुक्ति अभियान के लिए एमडीए (मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन) चलाने का फैसला लिया है. एमडीए प्रोग्राम के दौरान ट्रेंड हेल्थ वर्कर द्वारा दवा खिलायी जायेगी. विभागीय मंत्री बन्ना गुप्ता ने लोगों से इस अभियान को सफल बनाने की अपील की है. इसके लिए स्वास्थ्य कर्मियों की मदद करने को कहा है.
झारखंड सरकार हर नागरिक तक स्वास्थ्य सेवाएं की सुनिश्चितता हेतु वचनबद्ध है।राज्य के 4 फाइलेरिया एंडेमिक ज़िलों में 22 फरवरी से MDA कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा दवा खिलाई जायेगी @JharkhandCMO #IndiaWillEndLF @dc_sahibganj @BokaroDc @DC_Ramgarh @dc_dhanbad pic.twitter.com/7H0GMvLlMs
— Banna Gupta (@BannaGupta76) February 21, 2021
निःशुल्क मिलेंगी दवाइयां
बन्ना गुप्ता के मुताबिक फाइलेरिया के संक्रमण से कई तरह के खतरे हैं. खासकर बच्चों को खतरा ज्यादा रहता है. ट्विटर पर उन्होंने एक वीडियो शेयर करते हुए कहा है कि फाइलेरिया के कारण बच्चे औऱ अन्य लोग विकलांग हो सकते हैं. इसकी रोकथाम संभव है. ऐसे में जरूरी है कि एमडीए प्रोग्राम को सफल बनाया जाये. बीमारी को जड़ से खत्म करने की पहल हो रही है. एमडीए के दौरान स्वास्थ्य कर्मी लाभुकों या संबंधित लोगों के पास जाकर निःशुल्क दवाइयां देंगे. लोगों को इसमें सहयोग करना होगा. ये दवाइयां पूरी तरह सुरक्षित हैं. झारखंड को फाइलेरिया मुक्त करने औऱ स्वस्थ राज्य बनाने में सबों का साथ जरूरी है.
कठिन हो जाता है जीवन का सफर
फाइलेरिया एक वेक्टर जनित बीमारी है. इसे हाथी पांव के नाम से भी जाना जाता है. फाइलेरिया संक्रमित मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है. यह मच्छर हमारे घरों के आसपास गंदे पानी व नाली में पाया जाता है. हालांकि यह बीमारी जानलेवा नहीं है पर इसकी चपेट में आये व्यक्ति के शरीर में विकृति पैदा हो जाती है. इसके बाद उसकी जिंदगी मौत से भी बदतर हो जाती है. सामान्यत: यह बीमारी बचपन में ही होती है. लेकिन इसका लक्षण कई सालों बाद पता चलता है. पीड़ित व्यक्ति में बुखार, दर्द और पैर के प्रभावित अंग में लालिमा जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. यही बाद में हाथी पांव में परिवर्तित हो जाता है. जीवन का सफर चुनौतीपूर्ण हो जाता है. इसलिए कहा जाता है कि फाइलेरिया से पीड़ित व्यक्ति को समय पर अपना इलाज जरूर कराना चाहिए.




