
– इंजीनियरिंग कॉलेजों की 2016-17, 2017-18 के एफिलिएशन का मामला
Ranchi: झारखंड में इंजीनियरिंग कॉलेजों और पॉलिटेक्निक संस्थानों के दो साल का एफिलिएशन रद्द किए जाने का मामला काफी तूल पकड़ता जा रहा है. राज्य सरकार की इस कार्रवाई से एक दर्जन इंजीनियरिंग कॉलेज और डेढ़ दर्जन पॉलिटेक्निक संस्थानों में पढ़ रहे छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है. उच्च तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास विभाग के निदेशक अरुण कुमार की ओर से सभी संबंधित विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों को मार्च 2019 में पत्र लिखकर 2016-17 और 2017-18 के लिए एफिलिएशन देने के पहले राज्य सरकार को सूचित करने का निर्देश दिया गया था.
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निदेशक ने अस्थायी एफिलिएशन देने को लेकर लिखा था पत्र

उन्होंने बीटेक पाठ्यक्रम की अस्थायी एफिलिएशन देने के संबंध में भी पत्र लिखा था. सरकार अब अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के उस विज्ञापन के जरिए सभी संस्थानों से एफिलिएशन लेने और एफिलिएशन के आधार पर वार्षिक कैलेंडर फॉलो करने की दलील दे रही है. इसमें स्पष्ट कहा गया है कि, एआइसीटीइ की तरफ से प्रत्येक वर्ष 10 अप्रैल को एफिलिएशन देने अथवा नहीं दिये जाने का फैसला लिया जायेगा.
15 मई के बाद किसी भी संस्थान को किसी तरह की मान्यता प्रदान नहीं की जायेगी. इसमें कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने सिविल अपील 9048 ऑफ 2012 में यह आदेश दिया था कि एआइसीटीइ की एफिलिएशन के बाद संबंधित विश्वविद्यालयों से भी इंजीनियरिंग, डिप्लोमा कोर्स संचालित करनेवाले संस्थानों को मान्यता लेनी होगी.
सुप्रीम कोर्ट का आदेश देखने के लिए यहां क्लिक करें – pdf देखने के लिए क्लिक करें
न्यूज विंग ने इसकी पड़ताल की और छात्रों के भविष्य को देखते हुए 17 जून को पहली कड़ी झारखंड : कई इंजीनियरिंग कॉलेजों को नहीं मिलेगी दो वर्ष की मान्यता, खतरे में सात हजार से ज्यादा छात्रों का भविष्य शीर्षक से खबर चलाया गया.
इस खबर को पढ़ते ही हजारों छात्रों के फोन न्यूज विंग को आने लगे. चूंकि कॉलेज प्रबंधन की ओर से खबर को फेंक बताया गया. लेकिन इससे संबंधित सारे साक्ष्य न्यूज विंग के पास मौजूद हैं, जिसे इस खबर में लगाया जा रहा है. ताकि छात्र भी सच से रूबरू हो सकें. साथ ही उन्हें भी साक्ष्यों को देखकर इस बात की पूरी जानकारी हो कि जिस कॉलेज में वे पढ़ रहे हैं, उसकी मान्यता है या नहीं.
साक्ष्य देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें – pdf यहां डाउनलोड करें
इसकी अगली किस्त एआइसीटीइ की अधिसूचना और राज्य सरकार द्वारा कोल्हान विश्वविद्यालय के कुलसचिव को भेजे गये पत्र की प्रति प्रकाशित की जा रही है.
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सात साल बाद झारखंड सरकार जागी

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के सात साल बाद झारखंड सरकार जागी और उसने भी यह आदेश लागू किया कि सभी इंजीनियरिंग, पॉलिटेक्निक, प्रबंधन, होटल मैनेजमेंट कोर्स संचालित करनेवालों को स्टेट बोर्ड ऑफ टेक्निकल एजुकेशन (एसबीटीइ), अब झारखंड टेक्निकल एजुकेशन और संबंधित विश्वविद्यालय से एफिलिएश लेनी होगी. उच्च शिक्षा विभाग के वर्तमान सचिव राजेश शर्मा के आने के बाद यह कार्य और तेज किया गया.
छह संस्थान विरोध में गये हाईकोर्ट
झारखंड सरकार के फैसले के विरोध में छह संस्थानों ने झारखंड हाईकोर्ट की शरण ली है. इसमें नीलय ग्रुप ऑफ एजुकेशन रांची, गुरु गोविंद सिंह इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी बोकारो, राम गोविंद कटारुका इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कोडरमा, आरवीएस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी जमशेदपुर प्रमुख हैं.
क्या कहते हैं निदेशक प्रो अरुण कुमार
विभाग के निदेशक प्रो अरुण कुमार कहते हैं कि हमें सुप्रीम कोर्ट का फैसला मानना है. इसका अनुपालन किया जा रहा है. संस्थानों को एफिलिएशन पहले ही ले लेनी चाहिए थी.
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