
Ranchi: झारखंड में जादू-टोना और डायन के नाम पर कई लोगों की हत्या कर दी जाती है. कई इससे प्रताड़ित किये जा चुके हैं. इन घटनाओं का सबसे ज्यादा खामियाजा गांवों के आदिवासी परिवारों को भुगतना पड़ता है. आधुनिकता के इस दौर में डायन बिसाही के बढ़ते मामले झारखंड के लिए शर्मनाक बना हुआ है.
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झारखंड राज्य में नक्सलवाद के बाद सबसे ज्यादा हत्याएं डायन-बिसाही के मामले में होते हैं और झारखंड के ग्रामीण इलाकों में आये दिन इस तरह की घटनाएं देखने को मिल रहे हैं, जिसने पुलिस की नींद उड़ा दी है. हत्या से अपराध का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है. झारखंड के खूंटी ,सिमडेगा,गुमला और रांची के ग्रामीण इलाकों में इस तरह के मामले ज्यादा आ रहे हैं.
आंकड़ा इस प्रकार है:
2016 में बुंडू में डायन-बिसाही के शक में एक ही परिवार के तीन लोगों की हत्या.
2015 में सरायकेला-खरसांवा जिले के कुचाई थाना क्षेत्र में डायन होने के शक में दो महिला सहित चार लोगों की हत्या.
2018 में गुमला के सिसई थाना क्षेत्र के बोंडो पंचायत में 65 वर्षीय शाहदेव उरांव व 60 वर्षीय बिगनी देवी की हत्या.
2018 में बुंडू में डायन होने के शक में बुधनी देवी कुल्हाड़ी से काटकर हत्या.
2018 में चाईबासा के चक्रधपुर प्रखंड के कुरुलिया गांव के रंजीत प्रधान ने रिश्ते में सास लगने वाली 50 वर्षीय मनुप्यारी देवी की डायन के शक में हत्या कर दी थी.
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