
New Delhi: इलेक्शन में फंडिंग को लेकर निर्वाचन आयोग ने ‘इलेक्टोरल बॉन्ड्स स्कीम’ को पारदर्शिता के लिए गंभीर खतरा बताया है. केंद्र सरकार के फैसले को गलत ठहराते हुए चुनाव आयोग ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय को जानकारी दी कि उसने केन्द्र को पत्र लिखकर कहा है कि राजनीतिक चंदे से जुड़े कई कानूनों में बदलाव के पारदर्शिता पर गंभीर परिणाम होंगे.
इसे भी पढ़ेंः कर्नाटकः मंत्री पुट्टाराजू के आवास पर आयकर का छापा, सीएम कुमारस्वामी ने पहले ही जताई थी आशंका
‘एफसीआरए 2010’ कानून में बदलाव से विदेशी फंडिंग का खुला रास्ता
आयेाग ने कहा कि ‘एफसीआरए 2010’ कानून में बदलाव से राजनीतिक दल बिना जांच वाला विदेशी चंदा प्राप्त करेंगे जिससे भारतीय नीतियां विदेशी कंपनियों से प्रभावित हो सकती हैं.
शीर्ष अदालत में बुधवार को हलफनामा दायर करने वाले चुनाव आयोग ने कहा कि 26 मई 2017 को उसने विधि एवं न्याय मंत्रालय को पत्र लिखकर अपने इस नजरिये से अवगत कराया था कि आयकर कानून, जनप्रतिनिधित्व कानून और वित्त कानून में बदलाव राजनीतिक दलों को चंदे में पारदर्शिता के खिलाफ होंगे.
उल्लेखनीय है कि जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 29 C में हुए संशोधन के तहत इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए हासिल चंदे की जानकारी राजनीतिक दलों को चुनाव आयोग को नहीं देनी होगी.
इसे भी पढ़ेंः शोपियां में मुठभेड़ में तीन आतंकी ढेर
आयोग ने चंदे के संदर्भ में लागू इस नियम को पारदर्शिता नीति के खिलाफ बताया. चुनाव आयोग ने ये भी कहा कि यदि राजनीतिक दल इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए मिलने वाले चंदे की जानकारी नहीं देते हैं, तो इससे उनके द्वारा सरकारी कंपनियों और अनजान विदेशी श्रोतों से पैसे लेने की गुंजाइश बढ़ जाएगी. जिसकी जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 29B के तहत मनाही है.
गौरतलब है कि एनडीए की सरकार ने 2017 में तमाम राजनीतिक दलों के विरोध के बावजूद इलेक्टोरल बॉन्ड को लागू करने का फैसला लिया था. केंद्र सरकार तर्क था कि इससे राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे में साफगोई देखने को मिलेगी.
इसे भी पढ़ेंःराहुल के आरोपों पर ममता का पलटवार, कहा- अभी वह बच्चे हैं




