
Ranchi: राज्य के सबसे बड़े हॉस्पिटल रिम्स में अव्यवस्था चरम पर है. आए दिन कुछ न कुछ मुद्दे को लेकर रिम्स में विवादों में बना रहता है. अब रिम्स में मरीजों की जांच टेंडर के चक्कर में फंस गई है. टेंडर के चक्कर में मरीजों की जांच नहीं हो पा रही है. चूंकि प्रबंधन ने वर्तमान में काम कर रही एजेंसी को रीएजेंट व जरूरी केमिकल देने पर रोक लगा दी है. वहीं प्रबंधन का कहना है कि अब नई एजेंसी ही मरीजों के पैथोलॉजी टेस्ट करेगी. लेकिन कोई भी एजेंसी टेंडर में इंटरेस्ट ही नहीं दिखा रही है. इसका खामियाजा इलाज के लिए आने वाले मरीज भुगत रहे है.
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अबतक दो बार निकाला टेंडर
हॉस्पिटल में सेंट्रल लैब के संचालन के लिए प्रबंधन ने टेंडर निकाला है. जिसमें दस साल तक रीएजेंट सप्लाई करने वाली एजेंसी को ही टेंडर देने का प्रावधान किया गया है. वहीं कंपनी को ही लैब की मशीन भी सप्लाई करनी है. इसके अलावा दस सालों तक मशीन का मेंटेनेंस भी सप्लाई करने वाली एजेंसी को करना है. इसके लिए अबतक दो बार टेंडर निकाला जा चुका है. इसके बाद भी किसी कंपनी ने इंटरेस्ट नहीं दिखाया है. अब फिर से लैब के संचालन के लिए टेंडर निकालने की तैयारी है.
कैपेसिटी 10 हजार प्रतिदिन, टेस्ट मात्र 3
न्यू ट्रामा सेंटर में नए सेंट्रल लैब की शुरुआत 2021 में की गई थी. जिसमें 24 घंटे में 10 हजार सैंपल टेस्ट करने की कैपेसिटी है. वहीं 22 तरह की जांच की जा रही थी. लेकिन कुछ दिनों से लैब में मात्र 3 टेस्ट ही हो रहे है. इस वजह से मरीजों को परेशानी हो रही है. वहीं हॉस्पिटल के लैब में सभी जांच नहीं होने से मरीजों को प्राइवेट लैब की दौड़ लगानी पड़ रही है. जिससे कि उनकी जेब पर चार गुना तक बोझ पड़ रहा है.
इनडोर में 1500 से ज्यादा मरीज
हॉस्पिटल में इनडोर में 1500 से अधिक मरीज हमेशा एडमिट रहते है. वहीं ओपीडी में भी मरीज 2000 से अधिक आते है. अब ज्यादातर मरीजों को टेस्ट के लिए डॉक्टर प्रेस्क्राइब करते है. पर कुछ मरीजों का टेस्ट ही हॉस्पिटल में हो पाता है. इसके बाद मरीज प्राइवेट लैब का रुख करते है. इसी का फायदा प्राइवेट लैब वाले उठाते है. वहीं दलाल भी चांदी काट रहे है.




