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#EconomicSlowDown खस्ता हाल ऑटो सेक्टर को राहत देने में सरकार पर पड़ेगा 30 हजार करोड़ का भार

New Delhi: देश का ऑटो सेक्टर भंयकर मंदी की चपेट में है. घटते मांग और बाजार में सुस्ती के कारण कार बनाने वाली कंपनियों को अपना न केवल प्रोडक्शन घटाना पड़ा है, बल्कि हजारों लोगों की नौकरियां भी चली गई हैं.

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ऑटो सेक्टर पर आये इस संकट से उबारने के लिए लगातार जीएसटी को घटाने की मांग की जा रही है. ऐसे में सभी की निगाहें 20 सितंबर को गोवा मे होने वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक पर टिक गई है.

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…तो लगेगी 30 हजार करोड़ की चपत

हालांकि, केंद्र और राज्य सरकारों के राजस्व विभाग के अधिकारियों का मानना है कि जीएसटी रेट नहीं घटना चाहिए. क्योंकि रेट घटने से राज्यों को राजस्व का भारी नुकसान होगा.

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टैक्स विभाग के आकलन के मुताबिक, ऑटोमोबाइल सेक्टर की डिमांड को मानते हुए सरकार अगर 28 पर्सेंट जीएसटी को घटाकर 18 पर्सेंट कर देती है तो सरकार को जीएसटी रेवेन्यू में कम से कम 30 हजार करोड़ रुपये की चपत लग सकती है.

इस रकम में वो फायदा भी शामिल है, जो टैक्स छूट के बाद बिक्री में आई उछाल की वजह से होगा.

जनसत्ता की खबर के मुताबिक, इससे पहले कोटक इंस्टिट्यूशनल इक्वीटिज की एक रिपोर्ट का आकलन था कि अगर पूरे ऑटोमोबाइल सेक्टर में 10 प्रतिशत जीएसटी की छूट दी गई तो सरकार पर सालाना 45 हजार करोड़ रुपये का बोझ बढ़ेगा.

उल्लेखनीय है कि दू व्हीलर समेत सभी गाड़ियों पर 28 प्रतिशत जीएसटी का दर लागू होता है. साथ ही गाड़ियों के मॉडल के आधार पर 1 से लेकर 22 प्रतिशत का सेस (उपकर) भी लगाया जाता है.

जीएसटी कम करने पर कई राज्य असहमत

20 सितंबर को गोवा में होने वाली, जीएसटी काउंसिल की 37वीं बैठक होगी. एक ओर जहां ऑटो इंडस्ट्री कारों पर लगने वाले 28 फीसदी जीएसटी को घटाकर 18 फीसदी करने की मांग कर रही है, जिस पर इस मीटिंग में विचार किया जाना है. वहीं दूसरी ओर, कई राज्य सरकारें ही इस पर सहमत नहीं दिख रही हैं.

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दिलचस्प बात यह है कि ऑटो इंडस्ट्री के लिए जीएसटी दर में कमी का विरोध तमिलनाडु और गुजरात जैसे बड़े ऑटो हब वाले राज्यों से नहीं हो रहा है, बल्कि केरल, यूपी और अन्य राज्यों से हो रहा है. खबर है कि कई राज्य सरकार आगामी मीटिंग में जीएसटी कटौती के कदम का विरोध कर सकती हैं.

18 प्रतिशत जीएसटी का मतलब है कि टैक्स में 10 पर्सेंटेज पॉइंट की छूट देना. साथ ही दूसरा नुकसान यह है कि जीएसटी कंपनसेशन एक्ट के तहत, उच्चतम स्लैब यानी 28 फीसदी के अलावा किसी अन्य श्रेणी में आने वाले उत्पादों पर सेस नहीं वसूला जा सकता.

राज्य सरकार के नजरिए से टैक्स आय में होने वाला यह नुकसान बेहद अहम है क्योंकि उन्हें 2022 तक हर साल 14 प्रतिशत जीएसटी रेवेन्यू में इजाफे के दर से टैक्स वसूलना है.

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