
NewDelhi/Patna : बिहार विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल्स पर नजर डालें तो नीतीश कुमार 15 साल के शासन के बाद सत्ता से बाहर हो रहे हैं. तेजस्वी यादव की सरकार बनने जा रही है. कुछ एग्जिट पोल्स कांटे की टक्कर बता रहे हैं, तो दो एग्जिट पोल्स में महागठबंधन को 150 से 180 सीटें मिलने की भविष्यवाणी है. हालांकि, असली नतीजों के लिए 10 नवंबर का इंतजार करना होगा.
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एनडीए को कुल 44.95 फीसदी मत मिलने की संभावना
लेकिन दिल्ली विश्वविद्यालय के विकासशील राज्य शोध केंद्र व राजनीति विज्ञान विभाग का संयुक्त सर्वे कुछ और ही कहानी कह रहा है. बिहार के विधान सभा चुनाव में एनडीए की सरकार बनने का अनुमान लगाया है. सर्वे के अनुसार एनडीए को कुल 44.95 फीसदी मत मिल सकते है.
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महागठबंधन को 106 सीट मिलने की संभावना
129 सीट इसके खाते में आ सकती हैं. वहीं, महागठबंधन को 106 सीट मिलने की संभावना है, जबकि इसे 38.04 फीसदी मत मिलने की संभावना है. लोजपा को 8.71 प्रतिशत मतों के साथ महज तीन सीट मिलने के अनुमान है. वहीं, 8.30 प्रतिशत मतों के साथ 5 सीटें निर्दलीय को जाती दिख रही है.
डीयू के अनुसार यह सर्वे एक योजनाबद्ध, वैज्ञानिक तथा सोद्देश्यात्मक ऑनलाइन सर्वेक्षण किया गया. डीसीआरसी समीक्षा’ की श्रृंखला में यह केंद्र द्वारा सम्पन्न चौथा वृहद चुनावी सर्वेक्षण है. विकासशील राज्य शोध केंद्र के निदेशक प्रो सुनील कुमार चौधरी की मानें तो चुनावी परिणाम का यह रुझान 28 अक्तूबर से 7 नवंबर 2020 के दौरान बिहार की सभी 243 विधानसभाओं के लगभग 9044 मतदाताओं के मत-व्यवहार पर किये गये अध्ययन पर आधारित है.
राजनीति विज्ञान विभाग के लगभग 200 विद्यार्थी शामिल हुए
इस सर्वेक्षण में दिल्ली विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के लगभग 200 विद्यार्थियों व शोधार्थियों द्वारा 6 समन्वयकों के निर्देशन में ऑनलाइन प्रश्नावली के माध्यम से चुनाव के तीनों चरणों में मतदाताओं के मत-व्यवहार से संबन्धित आंकड़ों का संकलन किया गया.
इस सर्वेक्षण में बिहार के विभिन्न विश्वविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों, विद्यार्थियों तथा शोधार्थियों ने भी विशेष योगदान दिया है. डीसीआरसी के निदेशक प्रो सुनील के चौधरी बिहार विधानसभा चुनाव सर्वेक्षण के योजना प्रारूप, इसकी क्रियान्वयन संरचना तथा परिणामों को बड़े प्रयास की संज्ञा देते हैं.
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2015 विधानसभा चुनाव में एग्जिट पोल्स जनता का मूड भांपने में नाकाम थे
वैसे 2015 विधानसभा चुनाव की बात करें तो एग्जिट पोल्स जनता का मूड भांपने में नाकाम रहे थे. उस समय एग्जिट पोल्स के आंकड़े चुनाव परिणाम वाले दिन दोपहर होते-होते पलट गये थे और भाजपा कार्यालय में लड्डू बने रह गये और आतिशबाजी को बीच में ही बंद करना पड़ा था. हालांकि, भाजपा इस बार दुआ मांग रही होगी कि एग्जिट पोल्स फेल हो जायें.




