
Dumka : दुमका प्रखंड के कई गांवों के लोग पेयजल संकट से झूझ रहे है. हालात इतने बदतर हो गये हैं कि लोग गांवों से पलायन करने को सोच रहे हैं, दुमका जिले की विभिन्न पंचायतों के तहत आने वाले दो दर्जन से अधिक गांवों में इन दिनों पीने के पानी की भारी किल्लत बनी हुई है. दरबारपुर पंचायत के अन्तरगर्त कुलडीहा गांव में पानी के लिए महिलाओं को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है.
महिलाएं गांव से दो किलोमीटर दूर जाकर पीने का पानी ला रही हैं. गांव में मौजूद दो कुएं और पांच बोरिंग सूख चुके हैं. लोग अपने लिए तो किसी तरह पानी का जुगाड़ कर लेते है लेकिन मवेशियों के लिए प्रयाप्त पानी की व्यवस्था नही हो पा रही है.
डोभा का पानी पीने को विवश
दुमका जिले के मसलिया प्रखंड की कठलिया पंचायत के सुन्दरपुर गांव के ग्रामीण झरना/डडी व डोभा का पानी पीने को विवश हैं. सुन्दरपुर गांव में कुल चार टोले(चितान टोला,लातार टोला,बद टोला,डुंगरी टोला) हैं, जहां 109 घर है. गांव की आबादी 600 से अधिक है. गांव में कुल सात चापाकल है, जिनमें से पांच चापाकल वर्षो से खराब है. ग्रामीणों का कहना है कि इसकी सुध लेने वाला कोई नही है. जनप्रतिनिधियो से शिकायत करने के बाद भी यहां न तो चापाकलों की मरम्मत की जाती है और न ही जल समस्या का समाधान किया जाता है.
ग्रामीणों का कहना है कि हम कई सालों ते इसी डोभा का पानी पीते आये हैं. कई विधायक,सांसद आये, सरकारें आयीं और गयी. बड़े-बड़े वादे किये गये, लेकिन इस गांव में पीने के पानी की समस्या जस की तस बनी हुई है.
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पानी की टंकी बनायी जाये, पाइप लाइन चालू की जाये
ग्रामीणों के साथ-साथ गाय,बैल,बकरी आदि मवेशियों के लिए भी पानी की बहुत परेशानी हो गयी है. ग्रामीणों की मांग है कि हर टोले में कम से कम दो-दो अच्छे चापाकल लगाये जायें. पानी का टंकी बनायी जाये और पाइप लाइन चालू की जाये. नया बोरिंग कराया जाये. ग्रामीणों ने हा कि अगर जल्द ही जल समस्या का समाधान नही किया जाता है, तो आगामी विधान सभा में ”पानी नही तो वोट नही” की तर्ज पर वोट का बहिष्कार कर सकते हैं.
गांव के युवा होपनी मुर्मू कहते हैं कि पानी की समस्या इस कदर विकरल हो गयी है कि गांव छोड़ कर कही और चले जाने का मन करता है , लेकिन अपने मवेशियों को कहां ले जायें, यह समझ में नही आता. पानी की समस्या के कारण गांव के एक-दो ग्रामीणों ने अपने मवेशियों को रिश्तेदारों के घर पहुंचा दिया है.वे लोग गांव से पलायन करने को सोच रहे हैं.
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गांव में खराब पड़े चापाकल
डुगरी टोला में बबुजन मुर्मू के घर के सामने का चापाकल लगभग तीन वर्षो से खराब है. डुगरी टोला में संतालों के पूज्य स्थल मांझी थान के सामने का चापाकल खराब है. चितान टोला में मैनेजर हांसदा के घर के सामने का चापाकल चार वर्षो से खराब है. लातार टोला में दीपक मुर्मू के घर के सामने का चापाकल भी चार वर्षो से खराब है. बद टोला के सोमय मरांडी के घर के सामने का चापाकल गर्मी के दिनों में पानी नही देता है.
जब गांव में पानी की बात शुरू हुई तो ग्रामीण अपने घरों से निकाल कर आये और कहने लगे कि सरकार हमें बुनियादी सुविधा भी उपल्बध नही करा सकी है. ऐसे में वोट हम क्यो दें. गांव में शिक्षा का हाल भी बेहाल है. क्या सरकार कभी हमारे गांव के विकास पर ध्यान देगी? हम ग्रामीणों का अखिर दोष क्या है, सरकार ही बताये.
ग्रामीणों से बतचीत के दौरान बबुजन मुर्मू, जूली मरांडी, मनोज मुर्मू, प्रभु हांसदा, विलास मुर्मू, उमेश मुर्मू, सोनाली मरांडी, सारकील मुर्मू, सकदी टुडू, बिटिका मुर्मू, रासमुनी सोरेन, दलहन किस्कू,आरती हांसदा, होपनी मरांडी, मालती मरांडी, प्रकाश हांसदा,सूरजमुनि मुर्मू, चुड़की मुर्मू, सोनामुनी मुर्मू सहित काफी संख्या में महिला,पुरुष और बच्चे उपस्थित थे.
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डोभा का पानी पीने को विवश


