
New Delhi : दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को कहा कि उत्तरपूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा में एक पुलिसकर्मी सहित 10 व्यक्तियों की मौत हो गयी है. इसके बाद स्थिति से निबटने के लिए चांदबाग, करावल नगर, मौजपुर और जाफराबाद में कर्फ्यू लगा दिया गया है. दूसरी तरफ पुलिस असामाजिक तत्वों की संलिप्तता वाली घटनाओं पर कार्रवाई कर रही है.
दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता मनदीप रंधावा ने कहा कि उत्तरपूर्वी दिल्ली में स्थिति नियंत्रण में है. हालांकि राष्ट्रीय राजधानी के कई हिस्से अभी भी हिंसा की चपेट में हैं. रंधावा ने कहा कि हिंसा के संबंध में 11 प्राथमिकी दर्ज की गयी हैं.
उन्होंने कहा, ‘‘हम असामाजिक तत्वों से जुड़ी घटनाओं पर कार्रवाई कर रहे हैं. उत्तरपूर्वी दिल्ली में पर्याप्त बल तैनात किया गया है. आरएएफ और सीआरपीएफ को भी तैनात किया गया है.’’ उन्होंने कहा कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी स्थिति पर करीब से नजर रख रहे हैं.
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प्राथमिकी की मांग वाली याचिका पर बुधवार को सुनवाई
सीएए को लेकर हिंसा संबंधी शिकायतों पर प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने के अनुरोध वाली एक याचिका पर सुनवाई के लिए उच्चतम न्यायालय मंगलवार को तैयार हो गया. यह याचिका पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्ला और अन्य ने दाखिल की है.
न्यायमूर्ति एस. के. कौल और न्यायमूर्ति के. एम. जोसफ की एक पीठ के समक्ष याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया. पीठ ने कहा कि वह बुधवार को इस पर सुनवाई करेगी.
उत्तर पूर्वी दिल्ली में संशोधित नागरिकता कानून को लेकर हिंसा में मंगलवार को मृतकों की संख्या बढ़कर 10 हो गयी. हबीबुल्ला, भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद और सामाजिक कार्यकर्ता बहादुर अब्बास नकवी ने यह याचिका दायर की है.
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धरने पर बैठी महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग
इसमें सीएए को लेकर शाहीन बाग और राष्ट्रीय राजधानी के अन्य हिस्सों में जारी धरनों में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को निर्देश देने की मांग भी की गयी है. शीर्ष अदालत को शाहीन बाग से प्रदर्शनकारियों को हटाये जाने की मांग वाली दो अलग-अलग याचिकाओं पर बुधवार को सुनवाई करनी है.
अपनी नई याचिका में हबीबुल्ला, आजाद और नकवी ने आरोप लगाया कि, ‘‘कपिल मिश्रा, जो भीड़ को हिंसा और तोड़फोड़ के वास्ते उकसाने वाले बयान देने के लिए जाने जाते है, ने मौजपुर-बाबरपुर मेट्रो स्टेशन के निकट सीएए के समर्थन में एक रैली निकाली थी. इसी मेट्रो स्टेशन से दो किलोमीटर दूर जाफराबाद में शांतिपूर्ण प्रदर्शन चल रहे थे.’’
मीडिया रिपोर्टों का जिक्र करते हुए याचिका में आरोप लगाया गया है कि मिश्रा लोगों को उकसाने के बाद वहां से चले गये. इसके बाद जाफराबाद में हिंसा हुई और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को सुरक्षा के लिए भागने को मजबूर होना पड़ा.
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