
संजीव
Koderma: प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और कोडरमा के पूर्व विधायक स्व. विश्वनाथ मोदी कई मामलों में लोगों के लिये प्रेरणा के स्रोत हैं. स्वतंत्रता सेनानी के साथ ही वे तीन बार विधायक बने, दो पुस्तकें लिखीं और हजारों की संख्या में पौधे लगवाये. उनकी 10वीं पुण्यतिथि रविवार को झुमरीतिलैया में मनाई जाएगी.
स्व. विश्वनाथ मोदी का जन्म 20 जुलाई 1920 को जयनगर प्रखंड के गोदखर में हुआ था और 14 फरवरी 2011 को झुमरीतिलैया में उन्होंने अंतिम सांस ली थी. स्वतंत्रता आंदोलन 1942 में वे 8 महीने तक जयप्रकाश नारायण के साथ हजारीबाग जेल में रहे. स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उन्होंने आंदोलन कारियों के साथ डोमचांच में डाकघर को आग लगाई थी.
गिरफ्तारी के पहले अंग्रेजी हुकूमत ने उनकी खूब पिटाई करवाई और मरा समझकर गाड़ी से फिकवा दिया था. कुछ दिनों बाद उनके जीवित होने की खबर आई तो इलाके में दीये जलाए गए थे. स्व. मोदी ने जीवनभर अभ्रख मजदूरों, किसानों के शोषण के खिलाफ लड़ाई लडी. वहीं इमरजेंसी के दौरान 1975 में डॉ. राम मनोहर लोहिया के साथ भागलपुर व हजारीबाग जेल में बंद रहे थे.
स्व. मोदी 1967, 1969 एवं 1977 में कोडरमा से विधायक रहे. वर्ष 1977 में उन्होंने बिहार विधानसभा के लोक लेखा समिति के सभापति का भी दायित्व निभाया. 1965 में झुमरी तिलैया में कांग्रेस हटाओ देश बचाओ आंदोलन चलाया तथा 1969 के चुनाव में कांग्रेस की ओर से सुरेंद्र शर्मा के विरोध में चुनाव लडा था. कहा जाता है कि उस समय कांग्रेस की ओर से इंदिरा गांधी प्रचार के लिए झुमरीतिलैया पहुंची थी. एक तरफ इंदिरा गांधी का भाषण चल रहा था वहीं दूसरी ओर विश्वनाथ मोदी का. तब इनकी सभा मे श्रोताओं की संख्या दूसरी सभा से कम नहीं थी.
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स्वतंत्रता सेनानी विश्वनाथ मोदी को पर्यावरण से भी काफी लगाव था और झुमरीतिलैया गांधी स्कूल रोड स्थित अपने आवास परिसर 14 एकड़ में लगभग सात हजार पौधे लगाये थे, जिसमें अभी भी कई वृक्ष लगे हुए हैं. उन्होंने 1977 में पांच साल में नया हिंदुस्तान कैसे बने पुस्तक लिखी थी. वहीं 1999 में जनता जाने बड़े नेताओं के बड़े अपराध पुस्तक भी लिखी थी जिसमें उन्होंने 1942 से देश में घटी महत्वपूर्ण घटनाओं का जिक्र किया था.




